स्व. माटी जी को विनम्र श्रद्धांजलि- प्रसिद्ध साहित्यकार स्व.महेन्द्र देवांगन 'माटी' जी का श्रद्धांजलि सभा का आयोजन सहसपुर लोहारा के कबीर टेकरी में किया गया
कवर्धा :- जिले के सक्रिय साहित्यिक मंच भोरमदेव साहित्य सृजन मंच कबीरधाम के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध साहित्यकार स्व.महेन्द्र देवांगन 'माटी' जी का श्रद्धांजलि सभा का आयोजन सहसपुर लोहारा के कबीर टेकरी में किया गया था।
श्रद्धांजलि सभा मे पहुंचे कवियों का स्वागत उनके हाथ सनेटाईज़ करा कर किया गया। श्रद्धांजलि सभा का शुभारम्भ माटी जी के छाया चित्र पर माल्यार्पण व तिलक लगा कर किया गया, वरिष्ठ कवि राजकुमार मसखरे जी ने स्व. माटी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला।सम्पूर्ण कार्यक्रम को संचालक कवि हेमसिंह साहू "मास्टर" ने दो सत्रों में विभाजित किया । प्रथम सत्र में समस्त कवियों के द्वारा माटी जी को श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र समिति के विकाश और प्रचार प्रसार के लिए चर्चा व काव्य गोष्ठी का रहा। मंच के प्रसार के सार्थक परिचर्चा के पश्चात काव्यगोष्ठी का आरम्भ हुआ, काव्य गोष्ठी की ओपनिंग पारी कवि देवचरण धुरी जी ने खेला और अपनी दोहा के माध्यम से समाज को नइ सीख दिया, ततपश्चात नइ कविता के धनी राजकुमार मसखरे जी ने अपने 1988 म लिखे कविता "ओ रात से" अपने बीते दिनों की जिंदगी का हाल बयां किया। गजल के सशक्त हस्ताक्षर कुंज साहू ने अपनी पंक्ति "ये सफर मेरे मौत के बाद निभाओगे" से कवियों का मन मोह लिया, कवि रिखीराम धुर्वे दुजहा ने हास्य व्यंग्य 'गोबरधन' से कवियों को खूब हंसाया, कवि संजू उइके गंडई से व्यंग के बाण छेड़े, मंच के उपाध्यक्ष व लोककलाकार घनश्याम कुर्रे अलकरहा 'चलव आज लहू अपन मिलान कर लेथन' व 'घुरवा के दिन घलो बहुतरथे' से समाज को नया सन्देश दिया,
समाज से शोषित लोगो व गरीब मजदूर के लिए सदैव लिखने वाले रचनाकार कवि रामकुमार साहू ने अपनी रचना "कांटा हमर बांटा म अउ गुलाब उंकर होगे", व "आज रद्दा ह रद्दा भुलागे हवय" से समाज को एक नइ दिशा में प्रेरित करने वाली रचना प्रस्तुत किया, हास्य कवि धर्मेन्द्र डहरवाल हरहा ने अपने गोबर गीत से आय कवियों का दिल जीत लिया।
कार्यक्रम के अंतिम में सम्पूर्ण कार्यक्रम के संचालक कवि हेमसिंह साहू मास्टर ने "भैंसी गोबर बर पगुराय " से लोगो को खूब हंसाया। ततपश्चात स्रोता के रूप में सम्मिलित रूपेश मानिकपुरी जी ने माटी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मंच के सकारात्मक कार्य के लिए भोरमदेव साहित्य सृजन मंच कबीरधाम के कवियों की प्रशंसा किया। कोरोना काल मे इस सम्पूर्ण कार्यक्रम के दौरान पहुंचे कवियों के द्वारा सोसियल डिस्टेंस का पूरा खयाल रखा गया।





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