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छत्तीसगढ़ी भासा म दूसर देस के भासा प्रभाव- छत्तीसगढ़ी आलेख- अनिल कुमार पाली तारबाहर बिलासपुर|
चुनाव तिहार आथे त जगह-जगह छत्तीसगढ़ी म गोठ होथे, चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ी भासा अउ छत्तीसगढ़िया मन ल पूछे नइ-
 किसी भी समाज मे आपसी मतभेद के कारण समाज के भविष्य बर्बाद नही करना चाहिए-
रंग-गुलाल के तिहार होली म हुड़दंग मचा के तिहार के पहिचान अउ महत्व ल बरबाद करे जात हे- युवा कवि साहित्यकार   अनिल कुमार पाली  तारबाहर बिलासपुर
मन भुइयाँ सोंच समुंदर…! दुख-सुख तृस्ना इँकरे अंदर…!! कवि जोहन भार्गव जी सेंदरी बिलासपुर
दाई बिलासा के पावन पाँव, कवि-जोहन भार्गव जी
छत्तीसगढ़ी भाषा ल आठवी अनुसूची म सामिल करवाना अब्बड़ जरूरी हवय।- अनिल कुमार पाली
कालेज म एम,ए, छत्तीसगढ़ी अउ छत्तीसगढ़ी डिप्लोमा कोर्स करईया लईका मन के का होही?
जात-जात ल बाँटे हावै जात के ठेकेदार मन…!  अनकटार लैं डाँड़ अउ पइसा खात हे ठेकेदार मन…!
छत्तीसगढ़ म क्षेत्रीय पार्टी काबर जरूरी..? पढ़व पूरा लेख।
अभी के सबले बड़का रावन "नशा" तेखर नाश कोन करही?
चुनई तिहार छत्तीसगढ़ी कविता अनिल कुमार पाली युवा कवि साहित्यकार
हरेली के तिहार ह किसान के फसल ले जुड़े पहली तिहार हवय
छतीसगढ़ी कविता-छत्तीसगढ़ के एही माटी म, साहित्यकार अनिल कुमार पाली
नर्मदा दाई के उदगर असथान म लगथे बेलासपुर के सबले बड़का बेलपान के मेला
छत्तीसगढ़ी संस्करीति म महादान के तिहार हवय छेरछेरा ह।
लोकगीत  मँय छत्तीसगढ़ महतारी अँव- कवि अनिल जांगड़े
छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ी म पढ़ाई होवय दूसर राज के भासा म नइ
बेटी के जिनगी बर्बाद करत हे... मइके के जुराव
छत्तीसगढ़ी आलेख  'बांटा में मांगे तीजा के लुगरा' छत्तीसगढ़ के परंपरा अउ सम्मान-लेखक अनिल कुमार पाली