जोहार अउ नमस्कार दुनो येके बरोबर आये... बस भाषा के हवय अंतर...।
बिहनिया के सुरुवात जोहार अउ नमस्कार के संग करे जाये।हमर संस्करीति म लईका मन ल नानपन ले सियान मन के आदर सम्मान करे ल सिखाये जाथे, अउ अपन घर के संगे-संग बड़का सियान-सियानिन मन के गोड छुवे ल घलोक सुग्घर संस्करीति मानथे, अइसने म हिंदी भाषा म कोखरो भी सम्मान करें बर नमस्कार करे जाथे वइसने ही हमर छत्तीसगढ़ी संस्करीति म नमस्कार के जगह म जोहार कहे जाथे, छत्तीसगढ़ी जोहार ह हिंदी नमस्कार के बरोबर हवय, जेन मनखे ह छत्तीसगढ़िया हवय वो ह अपन भाषा म अपन सगा संगवारी मन से भेंट करे म सम्मान पूर्वक जोहार कर सकत हे, जइसे नमस्कार कहइया मनखे मन दूनो हाथ ल जोर के नमस्कार करथे वइसने जोहार करइया मनखे मन दूनो हाथ ल जोर के जोहार घलोक कही सकथे, अउ मनखे ह कोनो ल अपन कोती ले सम्मान देवत हे त ओमा हाथ जोर के सम्मान करना जरूरी नइ रहें बिना हाथ जोरे भी अपन भाषा म जोहार बोल के सम्मान अभिवादन कर सकत हे, जेखर से छत्तीसगढ़ म छतीसगढ़ी भाषा के विकास ह बोल चाल के भाषा म तेजी ले आघु बढ़ही, काबर की कोनो भी चीज ल बदले बर येके संग वोला नइ बदले जाये, कोनो भी चीज ल बदलना हे त थोड़-थोड़ कर के वोला बदले जाथे, जेखर से कोई भी चीज के नाव पहिचान ह मजबूती के संग बनथे, त अपन भाषा ल आघु बढ़य बर अइसने छोटे-छोटे परयास करे के जरूरत हवय जेखर से छत्तीसगढ़ी भाषा ह धीरे-धीरे जम्मो छत्तीसगढ़िया के मुख पोथी भाषा बन सके, अउ अपन भाषा ल गोठियाय बर कोनो भी छत्तीसगढ़िया ल लाज शरम नइ आना चाहि, तभे हमर छत्तीसगढ़ी भाषा ह जन-जन के भाषा बनही।
युवा कवि साहित्यकार
अनिल कुमार पाली
तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो न 7722906664






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