छेरछेरा के दान, दान के महापर्व छेरछेरा- छेरछेरा कोठी के धान ल हेरते हेरा,

                       छेरछेरा के दान


दान दीजव दाई मोर.. अन के तोर भरे रहे भंडार ओ..।
छेरछेरा के आगे हे परब दाई.. झन कर मोला निरास ओ।।

बड़े-बड़े बढावनी बाढ़े तोर.. लईका रहे खुशहाल ओ..।
मांग के सेंदुर बाड़े रहे..जियत सव साल ओ...।।
दे दे मोल छेरछेरा के दान ओ..।।।

खेत खलियान हरियर रहे.. धान के भरे भंडार ओ..।
भुइँया तोर चमकत रहे.. गाढ़ा-गाढ़ा होये धान वो..।।

आगे हव तोर दुवारी म.. लेवत राम के नाम ओ..।
दान के परब ल सुमर ले दाई...बने बने रहे घर दुवार ओ..।।
दे दे मोला छेरछेरा के अन दान ओ..।।।

छेरछेरा के आगे तिहार दाई...दे मोला धान ओ..।
कोठी कोठी भरे रहे...सब दिन तोर भंडार ओ....।।

महतारी बरोबर तोर रूप दाई...लईका के कर विस्वास ओ..।
मांगे बर तोर से आये हव मय...आये छेरछेरा के तिहार ओ... ।।
दे दे मोला दाई धान के दान ओ...।

युवा कवि साहित्यकार
अनिल कुमार पाली तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो न. 7722906664





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