अब राज्य को छत्तीसगढियावादी सरकार की जरूरत-अमित बघेल

 दो राजनीतिक पार्टी की आपसी लड़ाई में मरना आम जनता को ही है, राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के शीर्ष में एक दो छत्तीसगढिया चेहरो से कुछ नही होने वाला, प्रदेश को अब छत्तीसगढियावादी सरकार की जरूरत है। : अमित बघेल


कोविड-19 जैसे वैश्विक राष्ट्रीय महामारी के बीच दोनों राष्ट्रीय पार्टियां शानदार राजनीति खेलने मैं व्यस्त है। जिस राष्ट्रीय भारतीय जनता पार्टी ने पिछले साल पूरे देश में "नमस्ते ट्रंप" करके कोविड-19 फैलाया था। वही राजनीतिक पार्टी छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार से "रोड सेफ्टी क्रिकेट मैच" के ऊपर प्रश्न उठा रही है। जहां आम जनता के मरनी कार्यक्रम में 20 शादी में 50 लोगों की अनुमति है। दोनों राजनीतिक पार्टियां अपने निजी फायदे के लिए लाखों की संख्या में जनता को इकट्ठा करने से नहीं चूकते।


दोनों ही राजनीतिक पार्टी के बड़े-बड़े राज्यसभा सांसद आम जनता के बीच से गायब हैं। छत्तीसगढ़ कोटा से राज्यसभा सांसद बनी भाजपा की बिहार मूल की सुश्री सरोज पांडे का कोविड-19 इलाज दिल्ली के ऐम्स हॉस्पिटल में होने की सूचना प्राप्त है वही छत्तीसगढ़ कोटा से बने कांग्रेस के राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी के तो दर्शन ही दुर्लभ हैं। पूर्व में सोशल मीडिया से प्राप्त जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ का मंत्रिमंडल छत्तीसगढ़ के कोटे से बने राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी को जीत का सर्टिफिकेट देने स्वयं दिल्ली गया था। ऐसे में उनका छत्तीसगढ़ से गायब होना तो तयशुदा बात है।


जहां भाजपा के सांसद अपने सांसद निधि को आम जनता के बीच खर्च करना छोड़ सीधे केंद्र के हाथों सौंप देते हैं, वहीं कांग्रेस के विधायक अपने निधि से तालाब सौंदर्यीकरण, सड़क किनारे पेवर ब्लॉक लगाना, पार्क निर्माण, ऊंची मूर्ति, तालाबों चौक चौराहा का नाम परिवर्तन आदि में खर्च कर रहे है। पिछले 1 वर्ष में इन्होंने कोविड-19 के हमले से कोई भी सीख नहीं ली ना ही हॉस्पिटलों का निर्माण हुआ ना ही ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की कोशिश की गई। जिसका सीधा सीधा खामियाजा आम जनता भुगतने को मजबूर है।


छत्तीसगढ़ में कोविड-19 की स्थिति इतनी भयावह है कि अब केंद्रीय जेल रायपुर तक पहुंच चुकी है। पिछले एक डेढ़ सालों से न्यायालयों में सुनवाई लगभग बंद है, 1500 की क्षमता वाले जेलों में 2800 से 3000 लोग ठूसें गये हैं।  जिनमें 60% से 70% लोग विचाराधीन है, जिनको अब कोविड की समस्या झेलनी पड़ रही है न्यूज़ मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार हाल ही में 2 कैदियों का कोविड-19 से मौत हुआ है और पूरे जेल में खौफ का माहौल है जेल के बड़े अधिकारी क्वॉरेंटाइन है और आम कैदी मजबूर है, सरकार के ऊपर इन दो मौतों के लिए हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।


कुछ न्यूज़ चैनलों का कहना है छत्तीसगढ़ में ऑक्सीजन की कमी नहीं है छत्तीसगढ़ 8 राज्यों को ऑक्सीजन सप्लाई कर सकता है। मगर वर्तमान स्थिति बहुत बुरी है आम जनता 8000₹ - 10000₹ डिपॉजिट कर ₹200 से ₹500 प्रतिदिन की दर से मेंटेनेंस खर्च देकर सिलेंडर लेने को मजबूर है, सोचिए छत्तीसगढ़ की गरीब जनता का क्या हाल होगा, सरकार को लखनऊ ऑक्सीजन टैंकर भेजने से पहले अपने राज्य के गरीब लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराना चाहिए जरूरत पड़े तो अपने प्राशासनिक ताकत का उपयोग करते हुए इन ऑक्सीजन प्लांटों को अपने कब्जे में लेकर उचित डिमांड और सप्लाई की पूर्ति करनी चाहिए। इंजेक्शन की जरूरत, मारामारी और कालाबाजारी तो जग जाहिर है। राज्य सरकार के आंकड़ों में ऑक्सीजन की उपलब्धता और आम मरीज तक ऑक्सीजन पहुचने के बीच जो बड़ा फर्क है उसी का खामियाजा छत्तीसगढ़ की जनता झेल रही है।


धन-धान्य, खनिज संपदा से भरपूर इस राज्य में उस ऑक्सीजन प्लांट का क्या फायदा जो 8 राज्यों को तो ऑक्सीजन सप्लाई कर सकता है मगर उनके खुद के कर्मचारी और उनका परिवार सेक्टर 9 जैसे बड़े हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ते हैं।


दिल्ली से संचालित दोनों राष्ट्रीय पार्टियां छत्तीसगढ़ की आम जनता की वास्तविक जरूरतों और मजबूरियों से कोसों दूर है। सत्ता विपक्ष को कोस रहा है और विपक्ष सत्ता को।


राजा चाहे राम हो, चाहे राजा रावण जनता तो बेचारी सीता है यदि राजा राम हुआ तो अग्नि परीक्षा देनी पड़ेगी गर राजा रावण हुआ तो हरण कर ली जाएगी 


राजा पांडव हो या राजा कौरव जनता तो बिचारी द्रौपदी है, राजा पांडव हुआ तो जुआं में हार दी जाएगी, राजा कौरव हुआ तो चिरहरण कर ली जाएगी.... हर हाल में मरना आम जनता को ही है, इसलिए प्रदेश को अब ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो आम जनता के बारे में सोचे, छत्तीसगढिया के बारे में सोचे, दिल्ली से संचालित राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के शीर्ष में एक दो छत्तीसगढ़िया चहरे से अब बात नही बनने वाला, अब राज्य को छत्तीसगढियावादी सरकार की जरूरत।

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