कविता-15 अगस्त अमर रहे कवि अनिल जांगड़े

          15 अगस्त अमर रहे 
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तीन रंग के तिरंगा झंडा,हमर भारत के पहचान हे 

देश प्रेम के भाव जगावय,जान हमर अभिमान हे ।

वंदे मातरम् ,वंदे मातरम् 


भारत भूईयाँ सोन चिरईयाँ,अड़बड़ सुघ्घर निशानी हे 

वीरपुरूष बलदानी मनके, अमर  कथा  कहानी हे 

विजयी विश्व तिरंगा हमर,आन बान अऊ शान हे 

देश प्रेम के भाव जगावय,जान हमर अभिमान हे। 

वंदे मातरम्,वंदे मातरम् 


जान गँवाबोन ऐकर खातिर,धरती ल अपन बचाबोन 

दूध पिये हन महतारी के ,करजा ल अपन चुकाबोन 

मर जाबोन पर झूकन नई दन,अर्पण  हमर जान  हे 

देश प्रेम के भाव जगावय,जान हमर अभियान हे ।

वंदे मातरम्, वंदे मातरम् 


गुलामी के जंजीर ल तोडेन,बड़ दुख म ऐला पायेन 

धरती महतारी के खातिर, अड़बड़ खून बहायेन

लहर-लहर झंडा लहराबोन,हमर भारत के शान हे 

देश प्रेम का भाव जगावय,जान हमर अभियान हे ।

वंदे मातरम्,वंदे मातरम् 


शान तिरंगा मान तिरंगा , अऊ  तिरंगा जान  हे 

हिन्दु मुस्लिम सिख ईसाई ,सबो झन बर मान हे 

ऊँचा रहे तिरंगा झंडा  ,हमर पुरखा के वरदान हे 

देश प्रेम के भाव जगावय ,जान हमर अभियान हे। 

वंदे मातरम्,वंदे मातरम् 


🖊️अनिल जांगडे 

    सरगांव मुंगेली छत्तीसगढ़

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