दूल्हे ने शादी मंडप पहुचने से पहले बूढ़ादेव ठाणा जाकर की आराधना-
रइपुर। ज्ञात हो कि अभी कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना नामक एक गैर राजनीतिक संगठन ने प्राचीन बूढ़ादेव तालाब रायपुर में प्रदेश भर के देवस्थलों की मिट्टी लाकर बूढ़ादेव ठाणा का पुनर्निर्माण किया है, भविष्य में तालाब के बीचो बीच एक विशाल सल्ला गागरा का निर्माण होना है। बूढ़ादेव तरिया के मध्य का यह द्वीप जिसमें राज्यदेवता को पुनर्स्थापित किया गया है वह क्षेत्र वर्तमान में एक महातीर्थ बन गया है ।
छत्तीसगढ़ के मूलनिवासी अब अपने प्रत्येक शुभकार्य से पहले वहां जाकर बूढ़ादेव में माथा टेक रहे हैं ।
ऐसा ही मनोरम दृश्य तब देखने को मिला जब बेमेतरा जिले के बेरला के निकटस्थ रामपुर(भाड़) गांव के युवा प्रमोद नेताम अपनी बारात लेकर अपने भावी ससुराल कुशालपुर रायपुर जाने से पहले बारात लेकर बूढ़ादेव तालाब पहुंच गये और वहां स्थापित बूढ़ादेव का आशीर्वाद लेने के बाद ही अपने ससुराल विवाह स्थल पर पहुंचे ।
दूल्हेराजा प्रमोद नेताम ने वहाँ उपस्थित मीडिया से बताया कि उन्होंने अपना प्रथम निमंत्रण कार्ड भी रायपुर आकर बूढ़ा देवता को ही दिया था । उनका कहना था कि छत्तीसगढ़ के सभी मूल जाति समाज के कुल देवता बूढ़ादेव ही हैं जो हमारे गांवों के पुश्तैनी मकानों के रसोईघरों में या पूजास्थलों में प्रत्येक जातियों में एक ही समान रुप में मिट्टी की दो , तीन या चार पिंडी के अमूर्त रुप में स्थापित हैं । यही हमारे कुलदेवता, मूलदेवता या पुरखादेवता हैं । अनेक शाखाओं में षड़यन्त्र पूर्वक बांटे जा चुके छतीसगढ़िया जनता को अब अपमे मूल जड़ों की ओर लौटना ही होगा । मूल छत्तीसगढ़ी संस्कृति जीवित रहेगी तभी एक छतीसगढ़िया का अस्तित्व जिंदा रह पाएगा ।
युवाओं के बीच अपने संस्कृति के प्रति जागरूकता, बरसो से अपने मूल पहचान को तरसते छत्तीसगढ़ प्रदेश के लिए एक मिल का पत्थर साबित होगा।





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