#SAVE_NATURE
मोर पीरा ल काबर नइ जानत हव संगी,
हरियर भुइँया ल काबर उजाड़त हव।
आधुनिक विकास के रददा म रेंगत- रेंगत,
जंगल के रुख-राई ल बली चढ़ावत हस।
हरियर-हरियर बगरे जल,जंगल,जमीन ल
थोड़कुन पइसा बार बंजर भुंइया बनवात हस,
रुख-राई ह जइसने-जइसने कटावत हे,
मनखे के जिनगी ह घलोक सिरावत जात हे।
बन के होवत विनास ले, जीव परानी होवत हलकान हे।
जंगल हे त हरियाली हे, सुग्घर हवा-पानी के आस हे।
रचनाकार
अनिल कुमार पाली,
तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो.न:- 7722906664





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