मनखे ह बाबा गुरु घासीदास के बिचार "मनखे-मनखे एक बरोबर" सब्द के महत्तम ल कब समझही- छत्तीसगढ़ के महान पुरखा ह सब्बो मनखे ल जगाए बर छुवाछुत भेद-भाव के बिचार ल मनखे के मन ले निकाले बर "मनखे मनखे एक समान" के महत्तम ल सारी दुनिया म बगराइस तेखर बाद भी मनखे ह पुरखा के बोले सब्द के महत्तम ल नइ समझ सकीस, अभी के अतका आधुनिक बेरा म घलोक मनखे ह मनखे ले छुवाछुत के भावना छोटे-बड़े जाती के भावना रखथे, अउ ए बुता कम पढ़े लिखे मनखे ल जादा ग्यानी मनखे मन एक दूसर के परति रखथे, जेखर से अवइया पीढ़ी ह घलोक ओहि भावना ल धर के आघु बढ़त हे जेखर कारन अतका…
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