हमर भासा दूसर राज के भासा ल जबरन जोर के अपन मुड़ी ल फोहड़बे। संस्करीति नइ बांचही त काला धरबे, छत्तीसगढ़ ल कइसे तरबे। जाने त जग जानी, नइ कुछु त मुड़भसरा बानी। अपन भासा बनगे तभो ले, पाछु जुड़ा गे दूसर के भासा बानी। काखर-काखर ल धर लेबे, अपन भासा ल कब तरबे। दूसरे के बानी मीठ मदिरा कस, अउ अपन भासा बन गे पानी। गोठिया-गोठिया कही के मर के बड़े-बड़े ग्यानी। जग म नइ जग सके रे छत्तीसगढ़िया मनखे तोर बानी। जेला पाबे तेला खिसियाबे भासा गोठियाये बर मनाबे। फेर झन भुलाबे अपन लईका ल महतारी भासा कब जनाबे। आप गोठ ल गोठियाबे तभे तो सुग्घर चिन्हाबे। कोड़ो-बोडो करबे त…
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