छत्तीसगढ़ी लोककला म चित्रकला के परमुख जगह हवय- हमर छत्तीसगढ़ ह अपन कला चित्रकारी के छेतर म विश्व परसीध हवय, इंहा के चित्रकारी ह देस के चारो मुड़ा म बगरे हे, अउ छत्तीसगढ़िया चित्रकार मन अपन कला के दम म छत्तीसगढ़ के नाव पूरा देस-विदेस म आघु बढ़ावत हे, छत्तीसगढ़ म चित्रकला ह छत्तीसगढ़ी लोक कला लोक परंपरा, लोक संस्करीति के ऊपर आधारित हवय। जइसे की कोनो विसेस तीज-तिहार के बेरा म तीज-तिहार ले जुड़े चित्रकला दीवार म उकेरे जाथे जेमा सबले परसीध हवय आठे कन्हइया के चित्र ह जेला आठे कन्हइया (जन्माष्टमी) तिहार के दिन घर के देवता कुरिया म, घर के अंगना म बना के कृ…
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