कोरोना के कहर
कोरोना कहर बरसात हे, टिण्डा आंधी लेके अत हे।
आँखी म देखत हवन, हमन आज अपन बरबादी।।
कोरोना कहर बरसात हे, मनखे ल सऊघे खात हे।
दुख म अऊ दुख के पीरा, टिण्डा ताण्डव मचात हे।।
जीव के विनाश करत हे, बाढ सुनामी तूफ़ान आंधी।
आँखी म देखत हवन, हमन आज अपन बरबादी ।।
भूकंप के जब कहर फूटथे, धरती भूईया ह काप जाथे।
मिट जाथे लाखो जीव जंतु, कतको माटी म दब जाथे।।
मरघट बन जाथे ओ जगह, जिहा रईथे घोर घना आबादी।
आँखी म देखत हवन, हमन आज अपन बरबादी।।
प्राकृति के साथ करथन, हमन अब्बड़ अपन मनमानी।
भुल जाथन येखर नियम, लिखथे फेर एक नवा कहानी।।
मत छेडव बरबाद करव, प्राकृति के हो आज आज़ादी।
कोरोना कहर बरसात हे, टिण्डा आंधी लेके अत हे।।
आँखी म देखत हवन, हमन आज अपन बरबादी।
✍ अनिल जाॅगडे सरगांव (मुंगेली )





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