छत्तीसगढ़ी भासा म दूसर देस के भासा प्रभाव- कोनो भी भासा ह अपना आप म संपूर्ण नइ होवय, कतको दूसर भासा ले मिल के कोनो राज्य के भासा बनथे- छत्तीसगढ़ राज्य के मनखे मन छत्तीसगढ़ी भासा म गोठ करथे जेला हमन छत्तीसगढ़ी भासा कईथन फेर कई ठन छत्तीसगढ़ी शब्द ह दूसर प्रदेश के शब्द आये जेला छत्तीसगढ़ी शब्द के रूप म गोठियाय जाथे। छत्तीसगढ़ी म उपयोग म लाये जाने वाला अंग्रेजी भासा के शब्द- अंजन, इस्कूल, इसनो, कंपोटर, कारड,असपताल, सइकल, कंडील, टेसन, बलाउज, लालटिन, सिरमिट जइसे शब्द अंग्रेजी के शब्द हवय जेला छत्तीसगढ़िया मन गोठियाये बर छत्तीसगढ़ी म उपयोग करथे। छत्तीसगढ़ी म…
व्यंग रचना मंत्री जी के लड़भर बोल चुनाव तिहार आथे त जगह-जगह छत्तीसगढ़ी म गोठ होथे, चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ी भासा अउ छत्तीसगढ़िया मन ल पूछे नइ- छत्तीसगढ़ म देखे ल मिलथे के चुनाव तीर म आथे त नेता मंत्री मन निमगा छत्तीसगढ़िया हो जथे, जिन्हा जाथे उन्हा छत्तीसगढ़ी म गोठियाथे, छत्तीसगढ़ी भासा म अपन भासन देथे, अउ जइसने मंच ले उतरथे त छत्तीसगढ़ी के संग हिंदी ल रपोट देथे, सुनईया मनखे मन घलोक मंत्री जी के गोठ सुन के अचंभित हो जथे। विज्ञापन के लिए संपर्क करें, whatsap No:- 7722 906664, E-mail-aarugnews@gmail.com तब मंत्री जी ले पूछे म बताथे के हमर छत्तीसगढ़ प्र…
किसी भी समाज मे आपसी मतभेद के कारण समाज के भविष्य बर्बाद नही करना चाहिए- किसी भी समाज में अधिकतर यह देखने को मिलता है कि कुछ पदाधिकारियों के आपसी मतभेद के कारण पूरे समाज में इसका प्रभाव देखने को मिलता है, जिसे दूर करने का प्रयास अन्य पदाधिकारियों या सदस्य के द्वारा नही किया जाता जिससे समाज में जुड़ने वाले लोग आपस में मतभेद होने के कारण समाज को बर्बाद कर देते है जिसका पूरा नुकसान आने वाली पीढ़ी को होता है, समाज में मतभेद होने का कारण कोई बड़ा नही होता है, यह दो लोगो के अचार या विचार नही मिलने के कारण हो सकता है, पर इस छोटी सी सोच के कारण पूरा समा…
रंग-गुलाल के तिहार होली म हुड़दंग मचा के तिहार के पहिचान अउ महत्व ल बरबाद करे जात हे- पूरा देश म होली के तिहार बढ़ धूम-धाम ले मनाये जाथे, वइसने हमर छत्तीसगढ़ म घलोक होली के तिहार ल अलग-अलग रूप म मनाये के परंपरा हे, धर्म अउ संस्करीति दुनो के मिले ले होली के तिहार रंगीन हो जथे, फेर कुछु तथाकथित मनखे मन होली ल हुड़दं अउ नशा के तिहार मान के ऐखर महत्व ल बिगाड़े के बुता करथे, छत्तीसगढ़ म होली मतलब होरी तिहार ह बसंत पंचमी ले सुरु हो जथे एहि दिन अंडा पेड़ के लकड़ी डारा के पूजा-पाठ कर के जेन जगह होलिका दहन करना हे तेन जगह गड़ाये जाथे, ओहि दिन ले होली …
मन भुइयाँ सोंच समुंदर मन भुइयाँ सोंच समुंदर… ! दुख-सुख तृस्ना इँकरे अंदर…!! ऊँच-नीच उतार-चढ़ाव जिनगी मौसम धूप-छाँव जाड़ा बारिस संग म पतझर…! दुख-सुख तृस्ना इँकरे अंदर…!! कोनो देखयँ बाग-बगइचा कोनो गरीबी ले उबरे के रद्दा आनी-बानी के मर्ज़ी मंज़र…! दुख-सुख तृस्ना इँकरे अंदर…!! प्रेम जब सर चढ़ के बोलय मधु रस म जहर ल घोरय करय चरित्र के हत्या भर…! दुख-सुख तृस्ना इँकरे अंदर…!! जीवन म हो एक लछमन रेखा झाँकय कोई झन बाहिर देखा खोट दिखय न पखउरा के ख़ंजर…! दुख-सुख तृस्ना इँकरे अंदर…!! एक कुआँरा एक कुआँरी चौखट लांघयँ फोरयँ दुआरी आगी लगावयँ कुल के भीत…
दाई बिलासा के पावन पाँव केवट दल के मुखिया रामा बेटी ओकर बिलासा अरपा तीर म डेरा डारिन बसे के जागीस आसा चार सौ बछर के जुन्ना कथा अउ इतिहास के बानी बंसी मेर बिहाव होगे पहाय लगिस जिनगानी धीरे-धीरे कई जात बस गे कुरमी धोबी जुलाहा तेली राऊत सतनामी नाउ भेंड़ी चरवाहा एही बस्ती म बनबरहा के होए लगिस आतंक बरहा मार के करिस बिलासा सगा समाज ल दंग एक दिन एक सिपाही सुन्ना घर म धरिस बिलासा ल लड़िस बिलासा भागिस सिपाही बद्दी भेजिस राजा ल एक दिन सिकार म निकलिस राजा भटक गे रद्दा ले बनबरहा ले घायल पहुँचिस गाँव बिलासा के सेवा बिक्कट करिन बिलासा बंसी राजा साय के …
लईका जब सबले पहली गोठियाय बर सिकथे त महतारी भाषा म गोठियाथे। छत्तीसगढ़ी भाषा ल आठवी अनुसूची म सामिल करवाना अब्बड़ जरूरी हवय।- कोनो भी राज्य म उन्हा के भासा ह राज्य के चिन्हा होथे जेखर ले वो राज्य के मनखे मन दूसर जगह जाये के बाद घलोक चिन्हाथे, कोनो मनखे कोनो दूसर राज्य म जाही त वोला देख के कोनो सही अंदाज नइ लगा सके के मनखे ह कोन देस कोन राज्य के हवय, जब मनखे ह गोठियाथे त ओखर बोली ल सुन के तुरते समझ म आ जाथे के मनखे ह फलाना राज्य के फलाना देस के रहने वाला हवय अइसने सबो राज्य के अपन पहिचान (चिन्हा) उन्हा के भासा हवय वइसने छत्तीसगढ़ राज्य के चिन्…
छत्तीसगढ़ राज्य ल बने तेइस बछर पुर गे, तभो ले छत्तीसगढ़ी भासा म पढ़इया लईका मन के सुध कोनो नइ लेवत हे। छत्तीसगढ़ राज्य म भासा अउ पढ़ाई के लड़ाई निरंतर चलत हे, पहली ले पांच कक्षा तक सब्बो विसय महतारी भासा छत्तीसगढ़ी म होये तेखर बर कतका लड़ाई लड़े ल पढ़ीस हे, तभो ले दे के एक विसय के रूप म पढ़ाई होये बर सुरू होइस हे, फेर कालेज म एम,ए, छत्तीसगढ़ी अउ छत्तीसगढ़ी डिप्लोमा कोर्स करईया लईका मन के का होही? उच्च शिक्षा म जब अपन महतारी भासा म पहली बेरा पढ़े बर मिलिस त लईका मन बढ़ उत्साह ले छत्तीसगढ़ी भासा म एम, ए, छत्तीसगढ़ी भासा कोर्स करे बर हबर गे अउ बने पढ़ लिख के पास…
जात-जात ल बाँटे हावै जात के ठेकेदार मन…! अनकटार लैं डाँड़ अउ पइसा खात हे ठेकेदार मन…! बड़े-बड़े गौंटिया बने हे… न्यायधीस के बड़े ददा माई पिल्ला समाज के मुखिया भाई सारा कका बबा अउ समाज के पढ़े लिखे मन मुड़ी गड़ा के बइठे हें जुगुर-जागर जउन करत खात हें अपने-आप म अँइठे हें अनगढ़-अनपढ़ बिगड़त हें मरतेच हें न मोटावत हें नसा म करथें झगरा फसाद अउ सगा ल डाँड़ पटावत हें मंझोल परिवार खाए अघाए जम्मे झन पगुरावत हें कत्तेक कुमत बर छाती कूटौं मोर अंतस लजावत हे भाग-भगा के पेट भरइया पइसा के बड़ ओगरा आयँ एही गभार भुइयाँ आय अउ मुखिया मनखे बोवत खायँ लाखों …
क्षेत्रीय पार्टी काबर जरूरी..? अनिल कुमार पाली छत्तीसगढ़ चुनाव के दिन लकठात हे त प्रत्यासी मन के धड़कन अउ लोगन मन के दिलचस्पी घलो बाढ़त हे। कई राजनीतिक पंडित मन के मानना घलो हे कि ये विधानसभा चुनाव (जेमे 5 राज्य शामिल हे) लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल हो सकत हे। काबर ये राज्य मन के परिणाम आगामी चुनाव बर पार्टी मन के स्थिति स्पष्ट करहि। अइसन म हमर छत्तीसगढ़ के गोठ घलो जरूरी हे। मौजूदा हालात म छत्तीसगढ़ म भारी खिंचतान घलो चलत हे, चाहे प्रत्यासी घोषणा बर असमंजस होय चाहे कुछ जगह मन म घोषित प्रत्यासी बदले के मुद्दा होय, चाहे बाहरी प्रत्यासी के मुद्दा होय…
आज के रावन "दारू" अउ ओला पीके नशा म रहईया मनखे हवय तेखर नाश कोन करही? बुराई म अच्छाई के जीत के तिहार रावन दहन के बेरा म मनखे मन ल आज के बेरा म बगरे सबले बड़े रावन जेन समाज म बुराई के प्रतीक हे तेला मारना हे, हमर लईका मन के जिनगी ल बर्बाद करे वाला रावन नशा हवय तेला पहली मारे ल लगही काबर की येही नशा ल कर के मनखे मन रावन ले भी बड़का रावन बन जाथे, अउ सामाजिक बुराई म पड़ के कईठन पाप कर बइठथे, आज के मनखे ह नशा रूपी रावन के चंगुल म अइसे फसे हवय की अपन घर दुवार समाज सब ल बर्बाद कर देथे, हमर समाज म अपन पेठ जमा के बइठे नशा रूपी रावन ल सबले पह…
चुनई तिहार आये हे चुनाव के सबले बड़का तिहार, मतदान हे आप के पहली अधिकार। लोकतंत्र के मान ल आघु बढाहु, छत्तीसगढ़ म सुग्घर सरकार बनाहू। दारू,मुर्गा,साड़ी, बिछिया, बर झन ललचाहू, स्वास्थ,शिक्षा,रोजगार जेन देही तेला चुन के लाहू। झूट-लबारी मार के वोट मंगाइया मनखे ल, अपन दुवारी ले खदेड़ के भगाहु। मतदान कर के जागरूक मनखे कहहु, छत्तीसगढ़ महतारी के सम्मान ल बढाहु। नवा युवा मन सत प्रतिसत मतदान करे ल जाहु, घर के सियान मन ल संग म घलोक संगराहु। अनिल कुमार पाली तारबाहर बिलासपुर मो न:- 7722906664
हमर छत्तीसगढ़ के सुग्घर भुइँया म हरियर हे हरेली के तिहार- हमर छत्तीसगढ़ी संस्करीति म सावन महीना के दिन म छत्तीसगढ़िया मन के पहली तिहार हरेली ह छत्तीसगढ़िया किसान परिवार के बड़का तिहार हवय, छत्तीसगढ़िया हरेली तिहार प्राकृतिक अउ संस्करीति ले जुड़े तिहार हवय, हरेली के तिहार ह किसान के फसल ले जुड़े पहली तिहार हवय जेमा किसान मन बस एही मनोकामना करथे की सबो कोती सुग्घर हरियर भुइँया रहें सबो के खेती किसानी के बुता ह बने बने होके बने फसल होवय, अउ सब्बो परानी जीव-जंतु ल भुइँया दाई ह अइसने मया दुलार के संग खाये बर अनाज देवत रहें, एही दिन किसान मन अपन कुल देवत…
छत्तीसगढ़ के एही माटी म एही माटी म, लहू वीरनारायण के बगरे हे, एही माटी म बलिदान हो के, गौरव जेखर चमके हे। एही माटी म, बाबा गुरुघासीदास के गोठ ह बगरे हे, एही माटी ह तप के भुइँया बन के, मनखे ल संग म जोरे हे। एही माटी म बीर गुंडाधुर ह, भूमकाल के जननायक बने हे, एही माटी ल परदेसिया मन के, आतंक ले आजाद करे हे। एही माटी म पुरखा खूबचंद के, सुग्घर छत्तीसगढ़ बसे हे, एही माटी म,छत्तीसगढ़-छत्तीसगढ़िया के सपना सजे हे। एही माटी म लक्ष्मण मस्तुरिया ह, माटी के मया धरे हे, एही माटी म "मोर संग चलव" के, सुग्घर गीत ल गढ़े हे। एही माटी म पुरखा सुं…
नर्मदा दाई के उदगर असथान म लगथे बेलासपुर के सबले बड़का बेलपान के मेला बेलासपुर जिला ले लगभग दस कोस के दुररिह म तखतपुर तहसील बसे हवय तेखर ले थोड़किन दुरिहा म लगे गांव हवय जेला बेलपान गाँव के नाव ले जाने जाथे, जिन्हा के मानता हवय की इंहा ले छत्तीसगढ़ के छोटे नर्मदा दाई के उदगर होए हवय अउ इंहा ले रेंग के तीर-तखार के गाँव तक बोहाथे, बेलपान ले नर्मदा नदिया के रूप म उधगर होके थोड़ा आघु बोहाय के बाद मनियारी नदी म जाके समाहित होए के बाद आघु बढ़त अपन रूप ल मनियारी नदी के रूप म ले लेथे, इँहा के तीर तखार म रहइया गांव के मनखे मन मनियारी नदी ल घलोक नर्मदा …
छत्तीसगढ़ी संस्करीति म महादान के तिहार हवय छेरछेरा ह। हमर छत्तीसगढ़ी संस्करीति म दान करे के अउ दान लेके दुनो परमपरा ल एक संग जोर के रेंगाइया तिहार आए छेरछेरा ह, देखे बर मिलथे की कोनो भी तिहार संस्करीति म एक विशेष दान दे के अउ दान लेहे के चलन रहिथे, फेर हमर छत्तीसगढ़ी संस्करीति में दुनो चीज एक संग देखे ल मिलथे, जेमा घर के लईका मन धान के दान मांगे ल जाथे त घर के माई लोगिन मन अवइया मनखे मन ल लईका मन ल धान के दान देथे, अइसे कर के हमर संस्करीति के तिहार छेरछेरा ह कई बछर ले दान के महादान तिहार के रूप में पूरा छत्तीसगढ़ म बगरे हे। किसान के जिनगी खेती…
लोकगीत मँय छत्तीसगढ़ महतारी अँव 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 छत्तीसगढ़ मँय पावन माटी गाँव-गँवईं के चिनहारी अँव मँय भुईयां धान कटोरा रे छत्तीसगढ़ महतारी अँव । मँय सोनहा भुईयां धान कटोरा छत्तीसगढ़ के माटी अँव जनम देवइया करम लिखइया सुख-दुख के साथी अँव मँय खेलत डंडा भौंरा बाटी लईका के किलकारी अँव मँय भुईया धान कटोरा रे छत्तीसगढ़ महतारी अँव । मँय अरपा पैरी शिवनाथ मँय महानदी के पानी अँव खेत खार मँय डोली धनहा नाँगर बइला किसानी अँव बनिहार भूथियार किसान के मँय माटी संगवारी अँव मँय भुईयां धान कटोरा रे छत्तीसगढ़ महतारी अँव । मँय सुआ ददरिया कर्मा रे…
छत्तीसगढ़ी भासा के पीरा कब सिराही रे ? हमर छत्तीसगढ़ राज ल बने 21 बछर पुर गे हे, अउ अतका बछर पूरे के बाद घलोक जइसे जइसे बेरा ह आघु बढ़हीस त छत्तीसगढ़ के संस्करीति,भासा,सम्मान ह घलोक आघु बढ़तीस अइसे होना रहिस हे ऐखर ले उल्टा छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़िया संस्करीति कला ल मिटा के दूसर राज के सांस्करीति बोली भासा ल छत्तीसगढ़ के मुड़ी म ल के खपलत हे, ए कोनो नवा गोठ नोहे कि पहली बेरा छत्तीसगढ़ म गुजराती भासा ल पढ़ाए के गोठ होए हे, ऐखर ले पहली घलोक छत्तीसगढ़ म ओड़िया भासा पढ़ाए के पहल होए हे अउ कईठन भासा हे जेला छत्तीसगढ़ म बढ़ावा दे बर शासन के संग बाहिर ले आए मनखे मन…
बेटी के जिनगी बर्बाद करत हे... मइके के जुराव कोनो भी मनखे ल जीवन म एक संगी के संग के जरूरत पढ़थे, जेखर ले जियत भर ले एक दूसर के संग अपन सुख-दुख बांट के जिए जा सकें, अइसने पवितर डोरी म बंधे बर दु अनजान मनखे देवता के आघु म किरिया खा के दु ले एक हो जथे, अउ कई जनम तक एक दूसर के संग नइ छोड़े के किरिया खा के अपन नवा रददा के संग नवा जीवन के सुरुवात करथे। तभो ले कुछु रिश्तेदार अउ मइके के बुद्धि ले रेंगें के कारण पुरखा देवता के किरिया खा के एक होए नवा जोड़ी मन ऐखर शिकार हो जाथे, अउ मया के बनाए मड़वा ह पुलिस थाना कोर्ट कचहरी के आघु पाछु घुमत घुमत सिरा ज…
छत्तीसगढ़ी आलेख 'बांटा में मांगे तीजा के लुगरा' छत्तीसगढ़ के परंपरा अउ सम्मान छत्तीसगढ़ म बेटी बहनी मन ल तीजा मनाए बर मइके के मन ससुराल ले बढ़ मया अउ सम्मान ले घर ले के आथे, जेमा करू भात खाए के बाद बहनी बेटी मन के उपवास रही के परंपरा ह चलत आत हे, घर के माइलोगिन मन के संगे-संग परिवार के सब्बो मनखे मन वो दिन करु भात ल घलोक खाथे, हमर छत्तीसगढ़ी संस्करीति म दाई-ददा के बाद सबले सम्मान सुवारी मन अपन घर वाला ल देथे, एही म जाने के बात हवय की माता पार्वती ह भगवान शंकर ल पाए बर अन जल ल त्याग के तपस्या करिस हे तेही ल हमर संस्करीति म तीज उपवास कहिथ…
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