होलिका दाई मेर भेंट …!! चला होलिका दाई मेर भेंट करे जाई…! छेना संग जरो देबो अपनो बुराई…!! फागुन के पुन्नी कस अंजोर रहय मन बिना भेदभाव के बुकाय रहय तन गुलाल बुक-बुक के रंग म नहाई…! छेना संग जरो देबो अपनो बुराई…!! चला होलिका दाई मेर भेंट करे जाई…! लोभ हर जरोवत हावय दया अऊ ममता सोच हर सनात हे नसात हे मानवता छल छिद्र होगे आजकाल चतुराई…! छेना संग जरो देबो अपनो बुराई…!! चला होलिका दाई मेर भेंट करे जाई…!! धरम के मरम ल मनखे भुलात हे सरल प्रहलाद मन ले जम्मो के नंदात हे कब तक जरोबो प्रहलाद होलिका दाई…! छेना संग जरो देबो अपनो बुराई…!! कवि- जोहन भार्ग…
राखी के धागे 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼 🌼 सावन में मनभावन लागे, राखी का त्यौहार राखी के धागों में बंधा है ,भाई बहन का प्यार । प्यार छुपा है इन राखी में ,धागों में मोती जड़ा है सोना चाँदी से भी ज्यादा,सुन्दर रिश्तो से गड़ा है श्रावण मास लेकर आया,देख राखी का त्यौहार राखी के धागों में बंधा है , भाई बहन का प्यार । राखी के संग चंदन रोली, दीप के थाल साजे करे आरती टीका बंदन, हाथ में राखी बांधे बहन न मांगे धन दौलत,मांगे रक्षा का उपहार राखी के धागों में बंधा है, भाई बहन का प्यार । राखी के धागों का भईया,एक दिन मोल चुकाना रक्षा करना इस बहन का,तुम…
बिलासपुर म क्रांति सेना के जबर हरेली रैली म छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग देखे ल मिलिस बिलासपुर। (आरुग न्यूज) छत्तीसगढ़िया समाज एवं छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के द्वारा बिलासपुर में पहली बार बड़े रूप में हरेली रैली का आयोजन किया जा रहा है, जिसमे छत्तीसगढ़ की संस्कृति की झलक सुवा नृत्य, राउत नाचा,पंथी नृत्य, कर्मा नृत्य सब एक ही मंच में नज़र आएंगे, जिसे देख कर बिलासपुर के लोग गदगद हो गए पहली बार इस तरह का कोई आयोजन बिलासपुर में किया गया, इस तरह से भी यह रैली गुजरी उंहा मौजूद नागरिक टकटकी लागए रैली के ओर देखते रहें। इस रैली में छत्तीसगढ़िया क्रांत…
बांस शिल्प...छत्तीसगढ़ी संस्करीति म बांस के बने रोज दिन बौउरे वाला समान- हमर छत्तीसगढ़ के सांस्करीति म वन संपदा के भरमार हे, पूरा छत्तीसगढ़ प्रदेश ह खनिज संपदा ले भरे हवय, छत्तीसगढ़ ल कहे बर तो धान के कटोरा कहिथे फेर धान के संगे-संग इंहा हरियर जंगल, लकड़ी,लोहा भंडार,कोइला भंडार,बिजली उत्पादन, सब्बो के भरमार भरे हे, अइसने भंडार हमर छत्तीसगढ़ के जंगल मन म गांव के मनखे मन के जीविका के उपयोगी समान अब्बड़ अकन मिलथे, जेमा एकठन बढ़ उपयोगी वस्तु हवय जेला हमन बांस कईथन,बांस ह छत्तीसगढ़ के जंगल मन म अब्बड़ अकन देखे बर मिल जही, मनखे मन के जीवन म बढ़ उपयोगी होये क…
मय तो आदिवासी हंव कोल भील संवरा भुंजिया, अउ हावन कंवर कमार। बइगा हलबा मुड़िया माड़िया, भतरा अउ बिंझवार।। किसम किसम जनजाति मन, संस्करिति हमर बचाबो। अपन कला अउ रहन सहन ले, जग म नाव चलाबो।। सूरवीर अउ पराक्रमी, जेन पुरखा दिस बलिदान हे। वो पुरखा के नाव ले, मोर भुंइया के पहिचान हे।। आदिवासी नाव होये के, हमसब ला अभिमान हे। शिक्षित अउ संगठित होये ले, बाढ़त अब सम्मान हे।। जल जंगल के रखवाला भुंइया के मूलनिवासी हंव। सीधा सादा सबके हितवा, मय तो आदिवासी हंव।। आदिवासियों को हक अधिकार की प्रेरणा देने बनाया गया वीडियो एल्बम- "जल जंगल जमीन"…
अपने जड़ों की ओर लौटते छत्तीसगढ़िया युवा छत्तीसगढ़ी संस्कृति को बचाने में दे रहें है अपना योगदान- देवेंद्र नेताम बैलगाड़ी से गये ब्याहने अपनी दुल्हन छत्तीसगढ़ में बैलगाड़ी को सजा-धजा कर , बैलों के गले में घांघरा बांधकर बारात निकालने की समृद्ध प्राचीन परंपरा रही है । आधुनिकता के मोहपाश में बंधकर आज का छत्तीसगढ़िया युवा अपनी मूल परंपराओं से दूर जाता हुआ दिख रहा है लेकिन छत्तीसगढ़ के कुछ नौजवान आज भी छत्तीसगढ़ियापन को पुनर्स्थापित करने के लिये प्रयासरत दिख रहे हैं । उन्ही में से एक भिलाई के युवक देवेंद्र नेताम हैं जो सात जुलाई को सजी-धजी बैलगाड़ी लेकर अपन…
जीवनी सुरुज बाई खाण्डे जी छत्तीसगढ़ के माटी म घलोक संस्करीति साहित्य अउ कला बसे हे... छत्तीसगढ़ के अइसे कोनो भी कोंटा नइ होही जिन्हा लोक गीत, लोक गायन, लोक कला, लोक परम्परा, कहनी नइ होही। अइसने म हमर छत्तीसगढ़ के सांस्करीति के लोक गाथा भरथरी ल पूरा देश-दुनिया म बगरइया हमर पुरखा दाई सुरुज बाई खाण्डे जी के गोठ मैं आप मन ल बतावत हव। दाई सुरुज बाई खाण्डे ह छत्तीसगढ़ के धरोहर हवय जेन ह छत्तीसगढ़ के सांस्करीति ल लोकगीत ल छत्तीसगढ़िया मन के मया ल पूरा देश-दुनिया म अपन गायन शैली के माध्यम से बगराये हे। दाई सुरुज बाई खाण्डे जी के जनम 1…
मोर नोनी चुंचुनिया भाजी.. देख तो बइही...मोर नोनी ह..। कइसे चुंचुनिया भाजी कस चमचमा थे...। छत्तीसगढ़ के दुलावरिन नोनी ह...। अपन संस्करीति ल सब्बो डहर बगरात हे...। चुकचुक ले दिखे मुख ह...। अउ आंखी ल कइसे मटकात हे..। लुगरा पहिन हे बढ़ खांटी...। सुग्घर गेंदा कस महमात हे..। माथा म चंदा कस बिंदिया बोहे...। गर म मोती के माला सुहात हे..। चमचम ले बांधे मुट्ठी ल...। मोर चुंचुनिया भाजी गुसियत हे..। लाली-लाली लुगरा संग...। हरियर चूड़ी म बांह सजात हे..। दाई के लुकाये लालिमा ले... अपन होंठ ल चुकचुकात हे...। कनिहा म धर के हाथ ल...। बने छत्तीस…
छत्तीसगढ़ी संस्करीति म भादो महीना के पोरा तिहार- सब्बो जगह तिहार के संग परंपरा अनुसार पूजा पाठ करे के बुता होथे, येही म हमर छतीसगढ़ी संस्करीति म बढ़ सुग्घर किसान के संगवारी के तिहार के रूप म पोला के तिहार मनाथे, पोला तिहार म किसान मन अपन बुता के संगवारी बईला के वंदन करथे, जेमा घर के बईला ल बने नवहा धोवा के नवा पोशाक संग तरह तरह के रंग रोगन के संग वोला संजाथे, काबर की छत्तीसगढ़ी संस्करीति म बईला ह किसान के सबले बड़े सहयोगी होथे जेखर संग किसान मनखे मन मिल के अपन खेती बाड़ी के सब्बो काम बुता ल बढ़ सुग्घर ले करथे। पोला के दिन बईला मन ल सब्बो किसान ब…
हमर कतका सुघ्घर खपरा के छानी हमर कतका सुघ्घर खपरा के छानी । पानी बरसत म चुहे ओरी ओरी ।। सोनहा माटी के हमर घर दुवार लगे मेयार ऊपर पटिया बोहाये तन मेहनत के गिराके पसीना सुघ्घर कडेरी म बत्ता ठोकाये अरछी परछी संग छाये कुरिया छाये खपरा म नई चुहे रे पानी हमर कतका सुघ्घर खपरा के छानी । पानी बरसत म चुहे ओरी ओरी ।। खपरा के घर महल के समान ठण्डा गर्मी गर्मी म ठण्डा रईथे बगराथे सुमत के मया पिरीत थकहा जागर बड सुख कईथे खेती किसानी मोर पावन माटी सोनहा धान धराये बोरी बोरी हमर कतका सुघ्घर खपरा…
🌱दाई बनके हरेली आगे 🌱 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 हमर छत्तीसगढ़ धान कटोरा,धरती भूईया सबो हरियागे हरियर लुगरा म करके सिंगार,दाई बनके हरेली आगे।। सावन के रिम-झिम पानी,खेती खार सबो अघागे । खचवा डबरा तरिया नदिया,जम्मो के जीव जुडागे । लहलाहवत धनहा के धान,देख किसान मन हरियागे । हरियर लुगरा म करके सिंगार,दाई बनके हरेली आगे।। सावन महिना हरियर रंग,धरती दाई ल सजाये । करिया बादर बरखा रानी,घटा सावन के बरसाये । पडकी परेवना सुआ मैना,मया के रंग म सबो रंगागे । हरियर लुगरा म करके सिंगार,दाई बनके हरेली आगे ।। मन कुलकत आगे हर…
छत्तीसगढ़ संस्करीति के अकती तिहार छत्तीसगढ़िया किसान मन के पहली तिहार हे अकती, जेन दिन सब्बो किसान मन एक जगह जुरिया के अपन कुल देवता की पूजा-पाठ करथे,अउ ओहि दिन खेत म धान छिचे बर नवा बीज बोये के परंपरा हे,तेहि दिन ले किसान मन के नवा बछर के सुरुवात घलोक होथे, येखर बाद किसान मन अपन घर ले धान के बीज ल परस के दोना म धर के ठाकुर देव के तीर म ओखर पूजा कर के भुइयां म बगरा देथे, अउ अपन देवता ले बने खेती किसानी होये के गांव म सुख समृद्धि आये के विनती करथे, दोना के धान ल गांव के बइगा ह सब्बो ल बांट देथे। अकती म घड़ा दान दे के परं…
बस्तर का माटी तिहार हमर संस्करीति म माटी किरिया खा के नइ बोले झूठ बस्तर के माटी पूजा हमर छत्तीसगढ़ी संस्करीति म देवता-धामी के बढ़ महातम हे, जेमा छत्तीसगढ़िया मन सबले जादा मया अउ सबले जादा पूजनी माटी( मिट्टी) ल मानथे, जेमा चईत पाख म माटी ल माटी देवता, बूढ़ा देव, के नाव ले पूजथे, माटी के पूजा वाले दिन गांव के मुखिया पुजारी जेला गायता कहिथे ओखर संग गांव वाला मन मिल के माटी पूजा के दीन बेरा ल चुनथे, अउ माटी पूजा करथे, हमर संस्करीति म बड़े-बड़े तिहार माटी के आराधना कर केे सुरु करथे। आदिवासी संस्कृति माटी किरिया येही म हवय हमर आद…
https://anilpali.blogspot.com/?m=1 छत्तीसगढ़ि संस्करीति म गोदना परंपरा गोदना परंपरा छत्तीसगढ़ी संस्करीति म चित्रकारी लोकाचार परंपरा म गोदान के अब्बड़ महत्म हे येला छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़ी संस्करीति सामाजिक-आर्थिक, धार्मिक सब्बो म बढ़ ख्याति मिले हे, अउ ये पीरा देवइया परंपरा ल सब्बो छत्तीसगढ़िया आदिवासी मनखे मन आजो बढ़ खुशी अउ जिम्मेदारी ले निभात आत हे, काबर की गोदना गोदवाना कोनो आसान बात नोहे, गोदना गोदाये के सौउख कराईया मनखे मन ल अब्बड़ पीरा सहेन करें ल लगथे काबर के गोदना ल गोदे बर देवारिन द…
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