कवि अनिल जी की सुग्घर कविता- पावन हे सावन के राखी तिहार, राखी तिहार स्पेशल

पावन हे सावन के राखी तिहार
 
 
पावन हे सावन के राखी तिहार ।
भाई  बहिनी  के  मया  दुलार  ।।
घर दुवारी म भाई ल अगोरत 
खडे हे बहनी आँसु ल पोछत
भाई  बर  कतका  मया दुलार 
पावन हे सावन के राखी तीहार ।।
 
माटी के दीया संग चंदन रोली 
मीठ मीठ लागे बहनी के बोली 
बचपन के सुरता देखे घर दुवार 
पावन हे सावन के राखी तीहार ।।
 
चऊर के टीका आरती बंदन करही 
बांध के राखी मनोती मया के पाही 
सुघ्घर  रहय तोर घर अंगना दुवार 
पावन  हे  सावन के  राखी तीहार ।।
 
रेशम  के धागा म  बांधे मया ल
मनके  सुख दुख  बांटे मया ल
दाई  ददा के पाये  मया दुलार 
पावन हे सावन के राखी तीहार ।।
 
मईके के मया झन छुटय दुवारी 
एक लोटा पानी जीयत ल पावव
जुग जुग जीयत रह भाई  दुलरवा 
सदा अंजोर रहय तोर घर  दुवार ।।

 

- अनिल जाॅगडे (सरगांव मुंगेली )

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