पावन हे सावन के राखी तिहार
पावन हे सावन के राखी तिहार ।भाई बहिनी के मया दुलार ।।घर दुवारी म भाई ल अगोरतखडे हे बहनी आँसु ल पोछतभाई बर कतका मया दुलारपावन हे सावन के राखी तीहार ।।
माटी के दीया संग चंदन रोलीमीठ मीठ लागे बहनी के बोलीबचपन के सुरता देखे घर दुवारपावन हे सावन के राखी तीहार ।।
चऊर के टीका आरती बंदन करहीबांध के राखी मनोती मया के पाहीसुघ्घर रहय तोर घर अंगना दुवारपावन हे सावन के राखी तीहार ।।
रेशम के धागा म बांधे मया लमनके सुख दुख बांटे मया लदाई ददा के पाये मया दुलारपावन हे सावन के राखी तीहार ।।
मईके के मया झन छुटय दुवारीएक लोटा पानी जीयत ल पाववजुग जुग जीयत रह भाई दुलरवासदा अंजोर रहय तोर घर दुवार ।।
- अनिल जाॅगडे (सरगांव मुंगेली )






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