कोरोना के नइ हे दवा.. सब्बो ले दुरिहा रहे ल लगही.. कवि-अनिल जाॅगडे जी के बढ़ सुग्घर कविता एक घव जरूर पढ़व

         ऐखर नइये दवा, दुरिहा रहे ल लगही










अनिल जाॅगडे (सरगांव मुंगेली)


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