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छत्तीसगढ़ी कविता- कतका अकड़ तोर छाती म समाए हे ! अतका अकड़ झन गइन जउन आए हे !! कवि- जोहन भार्गव जी।
अस्करुहा के नोहय जाड़…दू म एक दवाई निमेर- कवि- जोहन भार्गव जी।
बाह्वन रैदास कसाई हिंदू मुस्लिम सिक्ख ईसाई, छत्तीसगढ़ी कविता जोहन भार्गव जी।
रोवयँ कलप-कलप के सब झन घर के नर-नारी !! दिवंगत बर महाभोज दोष बड़ भारी !! कवि- जोहन भार्गव जी
सम्हलत अउ सकेलत स्वयं लुका जाथे चंदा, छत्तीसगढ़ी कविता- कवि जोहन भार्गव जी।
गीता वेद कहइया ल क़ुरान पढ़े बर कहिथवँ मैं !! नियम धरम के नास्तिक ल संविधान पढ़े बर कहथवँ मैं !!- कवि- जोहन भार्गव जी
अभेद्य व्युह ल सोला बछर म टोर अमाइस अभिमन्यु ! हस्तिनापुर बर काल के मुँह म जा समाइस अभिमन्यु !!- छत्तीसगढ़ी कविता- कवि- जोहन भार्गव जी।
छत्तीसगढ़ी कविता- फूल गुच्छा कस खोपा म एक फूल महूँ ल खोंच लेकवि- जोहन भार्गव जी सेंदरी बिलासपुर (छ.ग)
बहुत होगे अब बंद करव ! धरम के नाव म काटा मारा बहुत होगे अब बंद करव,मंदिर मस्जिद मठ गुरुद्वारा-  कवि- जोहन भार्गव जी सेंदरी बिलासपुर (छ.ग)
माई भाखा के अँचरा, झन संग छोड़व संगवारी…!! घाम छाँव ला गुने कहे बर महिमा एकर भारी…कवि- जोहन भार्गव सेंदरी जी बिलासपुर (छ.ग)
छत्तीसगढ़ी कविता- लोकमाता अहिल्याबाई,  कवि - जोहन भार्गव जी गाँव - सेंदरी जिला - बिलासपुर (छ.ग)
करही सिक्षित रोजगरिहा समाज के नव निर्मान…!  लोकमाता अहिल्याबाई सामाजिक सेवा संस्थान…!!
छत्तीसगढ़ी कविता-एसों के नागपंचमी, कवि जोहन भार्गव जी की कविता।
छत्तीसगढ़ी कविता- लहुट चल जँवारा अपन खोंधरा म ढल गे मंझनिया, कवि जोहन भार्गव जी।
आवव संगी मिल-जुल के पेड़ लगाबो, हरियर नवा छत्तीसगढ़ बनाबो- युवा कवि साहित्यकार, अनिल कुमार पाली, तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
आ गे हरेली के तिहार थिरा ले जुड़ा ले गा किसान…कवि जोहन भार्गव जी।
मिलबो-जुलबो जाबो-बलाबो…!  हीत-मीत अउ मया बढ़ाबो…!! छत्तीसगढ़ी कविता, कवि- जोहन भार्गव जी।
छत्तीसगढ़ी कविता-तीपत हावय जेठ मंझनिया सेंकय हवा के आंँच कवि जोहन भार्गव जी।
छत्तीसगढ़ी कविता - दाई-ददा लइकन बर होथे कुम्हार, गीली सुक्खी माटी ल गड़हय अकार,  -जोहन भार्गव  जी  सेंदरी बिलासपुर छत्तीसगढ़
बन के मयारूक धोखा देना सीख गें सब। कवि जोहन भार्गव जी की छत्तीसगढ़ी कविता