छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस - आज के शुभ दिन में कवि अनिल जी की तरफ से बहुत ही सुन्दर कविता.... जरूर पढ़े आप सभी....

छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस - आज के शुभ दिन में कवि अनिल जी की तरफ से  बहुत ही सुन्दर कविता.... जरूर पढ़े आप सभी....



कविता 
खुशहाल राज्य छत्तीसगढ़
छईया भूईया कहते है
अन धन का भंडार यहा
धान  कटोरा कहते है
चंदन बरोबर महके मिट्टी 
माथे पर तिलक लगाते है।।

हरियाली का रूप यहा
कोयल  गीत  गाती  है 
बसंत  का  बहार यहा
देख  हवा इढलाती  है 
है पावन मिट्टी जिसकी
हम सब शीश झुकाते है।।

महानदी अरपा पैरी की
बहता  निर्मल पानी  है 
धान गेहूं सरसो अरसी 
खडी फसल मुस्काती है 
जंगल झाड़ी पहाड पर्वत 
सभी  यहा  लहराते  है 

भगवान यहा हर रूप मे
नीत दिन पूजे जाते है 
श्रम है यहा की आरती 
मिटटी की पूजा करते है 
लिये  उमंग  संग  सभी 
जीवन  गुजारा करते है।।

यहा की संस्कृति निराली 
हर मौसम मे देखे जाते है 
सुआ ददरिया करमा पंथी 
साथ मिलके गाये जाते है
सादा रूप यहा लोगो का 
छत्तीसगढ़ीया बढिया कहते है
खुशहाल राज्य छत्तीसगढ़ 
छईया  भूईया  कहते  है ।।
         जय छत्तीसगढ़ 
🖊️- अनिल जाॅगडे 
        सरगांव (मुंगेली)

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