कलाकार के पीरा ह बढ़ पिरावत हे साहब.... साहित्यकार अनिल कुमार पाली जी के कलम से..छत्तीसगढ़ के कलाकारों की स्तिथि

कलाकार के पीरा ह बढ़ पिरावत हे साहब....





हमर संस्करीति अउ परंपरा मा कला के अब्बड़ गुन गान हे, काबर की कला ह संस्करीति के पहिचान होये के संगे-संग पीढ़ी दर पीढ़ी परंपरा ल आघु बढ़ाथे, कोनो भी प्रदेश म देखहु त उंहा के कला अउ संस्करीति ले उंहा के नाव पहिचान सब्बो जगह बगरथे, अउ वोही कला ह येक कलाकार ल निमगा कला कलाकार बनाथे, जेखर से ओखर नाव अउ पहिचान बनथे, अतना सब्बो महतम के बाद घलोक हमर प्रदेश म कला अउ संस्करीति के कोनो पूछईया नइ हे, जेखर सबले बड़े गोठ अभी के बेरा म छत्तीसगढ़ के कलाकार मन के होवत दुर्दशा ले लगा सकथन, जिहा के कलाकार मन अपन कला के दम म बढ़ सुग्घर प्ररदरसन कर के पूरा देश बिदेश म अपन राज के नाव ल बादर अकन बगराथे, ओखर बाद घलोक हमर कलाकार मन राजनीति के भेंट चढ़ जाथे अउ अपन महतव ल गंवा देथे। 

कोनो भी राज बर बढ़ निरासा के गोठ होथे जिहा के कलाकार मन अपन अधिकार बर अपन कला के प्रदर्शन बर दर-दर भटकना पढ़थे, जिहा करोड़ रुपिया ल भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ा के चोरहा मन महतारी के अंचरा ल नोचथे वइसने थोड़कीं रुपिया बर कलाकार ल बेरोजगार कर के चाटुकार  मन नोचत रहिथे, अउ दूसर के दुवारी म मुड़ ढकनी फ़रिया के मांगे बर विवश कर देथे, जेन ह कोनो ल दिखे नइ काबर की हमर इंहा धृतराष्ट्र के राज ल देख के आघु बढ़ने वाला मन के कमी नइ हे, जेन मन बने बुता करे के बेर अपन आंखी ल मूंद लेथे। 

हमन ह सही म कलाकार के पीरा के गोठे करबो त पीरा तो वोला कहिथे साहब जिहा अपन राज के कलाकार ल दुवारी म मांगे के बुता करे ल पड़थे, उन्हें दूसर प्रदेश के कलाकार ल अपन कला अउ संस्करीति ल देखये बर बोरा भर के रुपिया पईसा देथे अइसने म अब्बड़ पिराथे सियान जिहा बुता घलोक नइ मिले अउ दूसर ल ला के मुड़ी म बईठा घलोक देथे। 

कलाकार के अइसने दुर्दशा के भागीदार वोहू मन हवय जेन मन अपन मनोरंजन बर भीड़ लगा के कलाकार के कला ल लूटथे तो फेर ओखर कीमत कभू नइ चुका सकें।




युवा कवि साहित्यकार
अनिल कुमार पाली, तारबाहर बिलासपुर
मो.न:- 7722906664


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