छत्तीसगढ़ के प्लांट म छत्तीसगढ़िया मन मजदूरी करत हे, अउ बाहिर ले आये मनखे मन अधिकारी बने बइठे हे- छत्तीसगढ़ के प्लांट म बड़े अवधा वाले पद म छत्तीसगढ़िया ल रोजगार नइ देवाय बाहिर के मनखे ल रोजगार देथे, छत्तीसगढ़ में जतना भी बड़का प्लांट/कंपनी चलत हे, उमन दूसर प्रदेश ले मनखे लेके आथे अउ छत्तीसगढ़ म रोजगार दे बर उमन ल कंपनी के अच्छा-अच्छा पद म रोजगार देथे, जेन जगह म प्लांट लगे हे उंहा के दु-चार गांव वाला ल रोजगार म रख लेथे ओही मनखे मन प्लांट मालिक के गुनगान करथे, अउ कोनो लोकल आदमी प्लांट के खिलाफ बोलथे त ओला समझाये के दबाये के बुता करथे, अइसने दु-चार …
छत्तीसगढ़ म संचालित बड़का कंपनी मन रोजगार के नाव म मनखे मन के बली लेवत हे- छत्तीसगढ़ म संचालित उद्योग म नियम के पालन नइ करे ले होवत हे, जानलेवा हादसा- हमर छत्तीसगढ़ ह सबो खनिज-संपदा ले भरपूर हे, जेखर कारन पूरा छत्तीसगढ़ के चिन्हा विश्व स्तर म बगरे हवय, पूरा देस-विदेस के मनखे मन छत्तीसगढ़ म आके उद्योग कंपनी लगाये बर तइयार रहिथे, ओखर बाद भी छत्तीसगढ़ म रहइया छत्तीसगढ़िया मन के स्तिथि सिरफ अतना हवय के छत्तीसगढ़ म खुले प्लांट म रोजी-मजदूरी करत अपन जीवन बितात हे, जबकि दूसर प्रदेश के मनखे मन छत्तीसगढ़ म आके बड़े-बड़े प्लांट लगाथे व्यापार करथे अउ छत्तीसगढ़िय…
चिरई-चिरगुन घर के अंगना म अब नइ आवय चिरईया, चु-चु कर के नइ जगावय चिरईया। पेड़-पौधा के छांव सबो कोती ले गंवागे, तिपत भुइँया म कहाँ लुकवाय चिरईया। नदिया तरिया सब सुक्खा पढ़ गे, पानी पिये बर चिरई-चिरगुन तरस गे। गांव-गली पक्का मकान बनगे, भूख-प्यास म चिरई बेचारी खार म मरगे। दाना-पानी कहूँ नही पावय चिरईया, अब्बड़ दुरिहा ले दाना खोज के आवय ठीहा। मनखे ल देख डरवाय जीव ह, कहाँ पाबे जी अब सिरावत हे चिरईया। युवा कवि साहित्यकार अनिल कुमार पाली तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
फागुन बीन मयारू के फागुन बीन मयारू के फागुन म सब फाग गीत गुनगुना थे..। रंग-गुलाल खीसा म धरे-धरे..।, एक-दूसर ल रंग लगाथे..। संगी-संगवारी मन नाचत-गावत होरी मनात हे..। अंगना म आगी बार के..। दाई मीठ-मीठ पकवान बनाथे..। तैं कहाँ लुकागे हस मोर चंदा रानी..। तोला रंग लगाये बर मोर मन ललचाथे..। धमक-धमक बाजत नंगड़ा-बाजा के धुन ह..। तोर बर मया के गीत सुनावत हे..। रही-रही के मोला घेरी-बेरी रंग गुलाल ह तोर सुरता देवता हे..। बइठे-बइठे तोर रददा जोहत..। माहुर कस नसा मन ल मतात हे..। तैं कब आबे मोर मयारू..। तोला रंग लगाये बर मोर मन ललचात हे..। …
रंग-गुलाल के तिहार होली म हुड़दंग मचा के तिहार के पहिचान अउ महत्व ल बरबाद करे जात हे- पूरा देश म होली के तिहार बढ़ धूम-धाम ले मनाये जाथे, वइसने हमर छत्तीसगढ़ म घलोक होली के तिहार ल अलग-अलग रूप म मनाये के परंपरा हे, धर्म अउ संस्करीति दुनो के मिले ले होली के तिहार रंगीन हो जथे, फेर कुछु तथाकथित मनखे मन होली ल हुड़दं अउ नशा के तिहार मान के ऐखर महत्व ल बिगाड़े के बुता करथे, छत्तीसगढ़ म होली मतलब होरी तिहार ह बसंत पंचमी ले सुरु हो जथे एहि दिन अंडा पेड़ के लकड़ी डारा के पूजा-पाठ कर के जेन जगह होलिका दहन करना हे तेन जगह गड़ाये जाथे, ओहि दिन ले होली …
जल, जंगल,जमीन के रक्षा बर सबो मनखे ल आघु आये ल लगही जंगल ल बचाना सबो के जिम्मेदारी आये- छत्तीसगढ़ म कटत हसदेव जंगल के मुदा धीरे-धीरे पूरा विश्व म बगरत हे, सबले बढ़े प्रकृति के दोहन ये जंगल म होवत हे ऐखर कारण ये मुदा ल बगरना भी चाही, काबर की जल,जंगल,जमीन के जरूरत सिर्फ गांव म जंगल क्षेत्र म निवास करईया आदिवासी मनखे या छत्तीसगढ़िया मन ल नइ चाही, ऐखर जरूरत हर एक मनखे ल लगही अउ जल जंगल जमीन के रक्षा बर हर एक मनखे ल आघु आये ल लगही तभे भारत देश के फेफड़ा कहे जाने वाला हसदेव जंगल के विनाश होये ले बच सकथे, जइसे मनखे ल जीवन जिये बर शुद्ध हवा के जरूरत सबो …
छत्तीसगढ़ के एही माटी म एही माटी म, लहू वीरनारायण के बगरे हे, एही माटी म बलिदान हो के, गौरव जेखर चमके हे। एही माटी म, बाबा गुरुघासीदास के गोठ ह बगरे हे, एही माटी ह तप के भुइँया बन के, मनखे ल संग म जोरे हे। एही माटी म बीर गुंडाधुर ह, भूमकाल के जननायक बने हे, एही माटी ल परदेसिया मन के, आतंक ले आजाद करे हे। एही माटी म पुरखा खूबचंद के, सुग्घर छत्तीसगढ़ बसे हे, एही माटी म,छत्तीसगढ़-छत्तीसगढ़िया के सपना सजे हे। एही माटी म लक्ष्मण मस्तुरिया ह, माटी के मया धरे हे, एही माटी म "मोर संग चलव" के, सुग्घर गीत ल गढ़े हे। एही माटी म पुरखा सुं…
छत्तीसगढ़िया मन छत्तीसगढ़ी भासा म लिखव तीज-तिहार, छट्टी-बरही, बिहाव- नेग-जोंग के नेवता ल- अनिल कुमार पाली छत्तीसगढ़ म रहईया छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़िया मनखे मन ल अपन संस्करीति ल सब्बो कोती बगराना चाहि, कोनो भी तीज-तिहार के बेरा म नेवता ल अपन भासा संस्करीति म लिखे के बगराये के अवसर ल कभू नइ भुलाना चाहि, जइसे-जइसे हमन सब्बो कोती अपन बोली भासा ल लिखे बोले कि चलन ल बगराबो त पूरा प्रदेश म हमर बोली भासा ह मनखे के मुख म बसे रही, अउ मुख म बसे के संगे-संग लिखे म घलोक आसनी होही, अइसने म अभी के बेरा म छत्तीसगढ़ म सब्बो कोती बिहाव के नेंग -जोंग माढ़ही, जेमा सग…
दया मया सुनता के 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 दया मया सुनता के भइया घर-घर दीया जलावव अंधियारी बर पुन्नी के चंदा बनके अंजोर बगरावव। 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 सोनहा माटी माटी के दीया माटी म घर ल सजावव सुनता पिरीत धरम के दीया जुरमिल सबो जलावव हंसी खुशी म ज़िनगी पहावव कोनो ल झन सतावव दया मया सुनता के भइया घर-घर दीया जलावव। 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 तन के दीया म मया के बाती, जग जग ल करव अंजोर सुख के सुघ्घर गठरी जोरव कहना ल मानव मोर सुमता सुरूज के दीया बारव भाग ल अपन जगावव दया मया सुनता के भइया घर-घर दीया जलावव। 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 देख देवारी म धान के बाली धरती म सोन बगराये ह…
कम्प्यूटर सम्बंधित जानकारी हिंदी में ★ इंटरनेट चलाने में सहयोगी ब्राउज़र ब्राउज़र के प्रकार - मोज़िला, गूगल क्रोम, ओपेरा, इंटरनेट एक्सप्लोरर, फोक्सपरो, माइक्रोसॉफ्ट एग, सफारी, ● ब्राउजर एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर के रूप में कार्य करता है। ● ब्राउज़र के माध्यम से इंटरनेट में उपलब्ध पेजों को देखा जाता है ● ब्राउज़र की सहायता से इंटरनेट चलाया जाता है, ● ब्राउजर गूगल के सहयोगी के रूप में कार्य करता है, ● प्रथम(first) पेज गूगल (search engine) में खुलने के बाद अन्य पेजों को खोलने के लिए ब्राउज़र की आवश्यकता पड़ती है Pali sir classes इंटरनेट ब्राउज़र ऑन…
छत्तीसगढ़ी भासा के पीरा कब सिराही रे ? हमर छत्तीसगढ़ राज ल बने 21 बछर पुर गे हे, अउ अतका बछर पूरे के बाद घलोक जइसे जइसे बेरा ह आघु बढ़हीस त छत्तीसगढ़ के संस्करीति,भासा,सम्मान ह घलोक आघु बढ़तीस अइसे होना रहिस हे ऐखर ले उल्टा छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़िया संस्करीति कला ल मिटा के दूसर राज के सांस्करीति बोली भासा ल छत्तीसगढ़ के मुड़ी म ल के खपलत हे, ए कोनो नवा गोठ नोहे कि पहली बेरा छत्तीसगढ़ म गुजराती भासा ल पढ़ाए के गोठ होए हे, ऐखर ले पहली घलोक छत्तीसगढ़ म ओड़िया भासा पढ़ाए के पहल होए हे अउ कईठन भासा हे जेला छत्तीसगढ़ म बढ़ावा दे बर शासन के संग बाहिर ले आए मनखे मन…
बेटी के जिनगी बर्बाद करत हे... मइके के जुराव कोनो भी मनखे ल जीवन म एक संगी के संग के जरूरत पढ़थे, जेखर ले जियत भर ले एक दूसर के संग अपन सुख-दुख बांट के जिए जा सकें, अइसने पवितर डोरी म बंधे बर दु अनजान मनखे देवता के आघु म किरिया खा के दु ले एक हो जथे, अउ कई जनम तक एक दूसर के संग नइ छोड़े के किरिया खा के अपन नवा रददा के संग नवा जीवन के सुरुवात करथे। तभो ले कुछु रिश्तेदार अउ मइके के बुद्धि ले रेंगें के कारण पुरखा देवता के किरिया खा के एक होए नवा जोड़ी मन ऐखर शिकार हो जाथे, अउ मया के बनाए मड़वा ह पुलिस थाना कोर्ट कचहरी के आघु पाछु घुमत घुमत सिरा ज…
छत्तीसगढ़ी आलेख 'बांटा में मांगे तीजा के लुगरा' छत्तीसगढ़ के परंपरा अउ सम्मान छत्तीसगढ़ म बेटी बहनी मन ल तीजा मनाए बर मइके के मन ससुराल ले बढ़ मया अउ सम्मान ले घर ले के आथे, जेमा करू भात खाए के बाद बहनी बेटी मन के उपवास रही के परंपरा ह चलत आत हे, घर के माइलोगिन मन के संगे-संग परिवार के सब्बो मनखे मन वो दिन करु भात ल घलोक खाथे, हमर छत्तीसगढ़ी संस्करीति म दाई-ददा के बाद सबले सम्मान सुवारी मन अपन घर वाला ल देथे, एही म जाने के बात हवय की माता पार्वती ह भगवान शंकर ल पाए बर अन जल ल त्याग के तपस्या करिस हे तेही ल हमर संस्करीति म तीज उपवास कहिथ…
बांस शिल्प...छत्तीसगढ़ी संस्करीति म बांस के बने रोज दिन बौउरे वाला समान- हमर छत्तीसगढ़ के सांस्करीति म वन संपदा के भरमार हे, पूरा छत्तीसगढ़ प्रदेश ह खनिज संपदा ले भरे हवय, छत्तीसगढ़ ल कहे बर तो धान के कटोरा कहिथे फेर धान के संगे-संग इंहा हरियर जंगल, लकड़ी,लोहा भंडार,कोइला भंडार,बिजली उत्पादन, सब्बो के भरमार भरे हे, अइसने भंडार हमर छत्तीसगढ़ के जंगल मन म गांव के मनखे मन के जीविका के उपयोगी समान अब्बड़ अकन मिलथे, जेमा एकठन बढ़ उपयोगी वस्तु हवय जेला हमन बांस कईथन,बांस ह छत्तीसगढ़ के जंगल मन म अब्बड़ अकन देखे बर मिल जही, मनखे मन के जीवन म बढ़ उपयोगी होये क…
मँय छत्तीसगढ़ महतारी अँव 🌴🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌴 छत्तीसगढ़ मँय पावन माटी गाँव-गँवईं के चिनहारी अँव मँय भूईयाँ धान कटोरा रे छत्तीसगढ़ महतारी अँव । मँय सोनहा भूईयाँ धान कटोरा,छत्तीसगढ़ के माटी अँव जनम देवइया करम लिखइया,सुख-दुख के साथी अँव मँय खेलत डंडा भौंरा बाटी,लईका के किलकारी अँव मँय भूईयाँ धान कटोरा रे, छत्तीसगढ़ महतारी अँव । मँय अरपा पैरी शिवनाथ, मँय महानदी के पानी अँव खेत खार मँय डोली धनहा,नाँगर बइला किसानी अँव बनिहार भूथियार किसान के,मँय माटी संगवारी अँव मँय भूईयाँ धान कट…
जितने अधिक वृक्ष हमारे आस-पास रहेंगें हम उतने सुकून की सांस ले सकेंगें- अनिल पाली बिलासपुर। (आरुग न्यूज) गड़रिया समाज बिलासपुर के युवाओं द्वारा पर्यवारण संरक्षण को प्रोत्साहन देते हुवे बिलासपुर शहर के विभिन्न स्थानों पर ऑक्सीजन युक्ति पौधें लगाएं जा रहें है इसी कड़ी में आज गड़रिया समाज बिलासपुर युवा प्रकोष्ठ द्वारा उसलापुर बिलासपुर में पीपल और बरगद के पौधें लगा कर उसे सुरक्षा प्रदान करने के लिए कांटो से घेर कर हमेशा उसकी सुरक्षा करने का संकल्प लिया, इससे पहले भी गड़रिया समाज के द्वारा लोगों को जागरूक कर वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहन किया जा रहा ह…
पर्यावरण मित्र सम्मान 2021 से सम्मानित किए गए अनिल कुमार पाली- बिलासपुर । बिलासपुर क्षेत्र में विभिन्न पर्व एवं जयंती के अवसर पर वृक्षारोपण कर उनके संरक्षण के लिए संकल्प के साथ सक्रिय भूमिका निभाते हुवे अनिल कुमार पाली और उनकी टीम द्वारा विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए जा रहे है जो कि बहुत ही प्रशंसनीय कार्य है इस कार्य को प्रोत्साहित करते हुवे वक्त मंच रायपुर द्वारा अनिल कुमार पाली को पर्यावरण मित्र सम्मान 2021 से सम्मानित किया गया है। वक्त मंच के द्वारा लगातार प्रतिभावान व्यक्तित्व को विभिन्न सम्मान से सम्मानित किया जाता …
आँखी रहत अंधरा...छत्तीसगढ़ म अब्बड़ चले हे... बाँटो अउ राज करो... divide and rule क्रांतिकारी लेख मोर कलम ले..क्रांतिकारी विचारधारा के संग। आँखी रहत अंधरा अगर कोनो ल कहिबो त ओमा सबले पहली हमर नाव आही... छत्तीसगढ़िया मन के...मैं सब्बो छत्तीसगढ़िया ल नइ कहत हव...तभो ले अब्बड़ से अब्बड़ झन तो एमा आही जही...काबर के पुरखा मन कहे हवय दूसर के गलती ले देख के सिखव...तभो ले हमन अपने आँखी म देखे रहिथन ओखरो बाद गलती करथन...अंग्रेज मन भारत म आइन त उंखर सबले बड़े हथियार रहिस हे....फुट डालो अउ शासन करो...जेला छत्तीसगढ़िया मन अपन आँखी ले देखें हे ओखर गवाह रहें हे.…
31 मई अहिल्या माता जयंती पर युवा प्रकोष्ठ गड़रिया समाज बिलासपुर द्वारा वृक्षारोपण किया गया- अनिल पाली बिलासपुर। समाज सेवा की ओर अग्रसर गड़रिया समाज के द्वारा 31 मई अहिल्या माता की जयंती के उपलक्ष्य में गड़रिया युवा प्रकोष्ठ के द्वारा ग्राम सेंदरी में पेड़ प्रेमी श्री दुजराम भेड़पाल जी के मार्गदर्शन में वृक्षारोपण किया गया... साथ ही पेड़ लगाने एवं उनके संरक्षण के लिए श्री दुजराम भेड़पाल जी सेंदरी बिलासपुर को बिलासपुर गड़रिया युवा प्रकोष्ठ के द्वारा साल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।। साहित्यकार अनिल कुमार पाली ने कहा वर्तमान में कोरोना महामारी के …
बस्तर म बस बस्तरिया मनखे नइ मरे हे छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़िया अस्मिता मरे हे। जिन्हा एक कोती छत्तीसगढ़ म एक थपडा अउ मोबाइल टूटे ले पूरा छत्तीसगढ़ के मनखे मन ओखर निंदा करत हे, वोही म दूसर कोती बस्तर म अपन प्राण देवइया आदिवासी मनखे मन के चीख पुकार ल कोनो राजनीतिक पार्टी ह अपन आवाज नई बना सकीस, त का बस ये मन इंहा दिखावा कर के राज करे बर आये हे अइसे का होंगे हे छत्तीसगढ़ म की इंहा के वन ल अपन देंवता मानने वाला मनखे मन ल विरोधी मान के उंखर हत्या कर दिए जाथे, अपन समाज ल बचाना अपन, संस्कृति ल बचाना अपन निवास ल बचाना, कोन सा बड़े अपराध हो गे। बस्तर के गोल…
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