माटी के दियना घर कुरिया ल रोसन करथे। नंदवात संस्करीति म माटी के दियना के मोल नइ रहीगे हे।
हमर छत्तीसगढ़ी संस्करीति में माटी ल बढ़ पवितर अउ गुनकारी माने जाथे, संगे-संग हमर जुन्ना संस्करीति म ले चलत आत परंपरा म सब्बो तिहार आये ले घर-दुवार तक ल माटी म लिपे के परंपरा रहे हे, काबर की जुन्ना बेरा म माटी ह सब्बो जगह मिल जाये खेती किसानी के बुता ह माटी म होथे माटी के बिना खेती किसानी के बुता नइ हो सके, अभी के बेरा म शहर के जगह में माटी ल थोड़कीं खोजे ल पढ़ जाथे। अउ पाछु बछर मन म घर ल माटी ले सजाये के बने परंपरा रहे हे, गांव संस्करीति के सब्बो मनखे मन बढ़िया-बढ़िया चित्रकारी ले अपन घर कुरिया ल सजा के राखे रहें, कुरिया के परदा म बने चित्रकारी ल घलोक माटी ले बनाये, जुन्ना बेरा म रंग-रोगन के जादा महत्व नइ रहिस हे, माटी के लेप अउ माटी के चित्रकारी के महतम जादा रहें जेखर ले माटी के बने घर-कुरिया ह बढ़ सुग्घर दिखे।
अउ अभी के बेरा म घलोक गांव-गवई म माटी ल घर दुवारी लिपे पोते के बुता म लाथे, काबर के माटी ल सब्बो संस्करीति म बढ़ पवितर मानथे, जइसे-जइसे आधुनिक दौर आवत गिस हे तइसने माटी के महत्व ह अउ ओखर ले बने समान मन के मोल ह कम होंगे हे, भारती संस्करीति के सबले बड़का तिहार देवारी म माटी के बने दियना सब्बो डहर सुग्घर बगरे रहिथे, जेखर ले घर के कोनो-कोना ह जगमगात दिया ले रोसन हो जाये, अउ जुन्ना बेरा म सब्बो के घर म बिजली नइ होवय त अपन घर ल रोसन करें बर गरीबहा मनखे मन माटी के दिया ल जला के अपन घर ल रोसन करें। फेर आज के बेरा म माटी के बने दियना देखे ल कम मिलथे, काबर के दिया के जगह ल विदेशी संस्करीति के चमक-धमक वाला लाइट मन ले डरे हे, जेखर ले हमर भारती संस्करीति म माटी ले बने समान मन के महतम पहली ले कम होगे हे, अउ गवालिन पूजा म घलोक सब्बो डहर आर्टिफिशियल प्लास्टिक के दियना देखे ल मिलथे जेमा कतको- चमक धमक वाला समान लगे रहिथे अइसने चमक धमक ल देख के मनखे मन ओहि ल जादा बिसाथे जेखर ले हमर संस्करीती के सुग्घर माटी के बने दियना बाजार हाट म कम बेचाथे, माटी के दियना कम बेचाथे कई के कुम्हार मनखे मन येला जादा बनाये नइ अउ बनाथे तभो ले थोड़कीं बनाथे, अइसने करत-करत आधु आने वाला बछर म माटी के दियना देखे बर नइ मिलही काबर की आज के बेरा म तिहार ह घलोक व्यपार हो गे हे, सब्बो व्यपारी मनखे मन बाहिर के समान खरीद के इंहा जादा कीमत म बेचथे, येखर ले इंहा के रहिया मनखे मन ल अपन समान बेचे म अब्बड़ समस्या झेले ल लगथे, जेखर ले छत्तीसगढ़ के व्यपारी कुम्हार मन आघु नइ बढ़ पात हे। त ये बार आप सब्बो झन प्रयास करहु की माटी के बने दिया ले अपन घर ल रोशन कर सकव जेखर ले कोनो दूसर मजदूर गरीब के घर घलोक रोशन हो सके।।






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