आगे तिहार सुरूति
कातिक अमावस आये हे, मनखे मन खुसी मनाये हे।
गांव गली दिखे सुघ्घर, अउ घर अंगना ह लिपाये हे।।
करेन अगोरा अब्बड़ हमन, आये हावय सालभर म।
दियना जलत हे जगमग, खोर गली अउ घर म।।
उजियारा होय सबो के जिनगी, खुसी म दिया जलाबो।
आगे तिहार सुरूति, गौरा बिहाव रचाबो।।
होहि बिहाव गउरा चावरा म, मड़वा सजे हे सुघ्घर।
धान के बाली संग दियना, करसा सजाबो दिनभर।।
मिल-जुल जम्मो बिहाव रचाबो, सुघ्घर खुसी मनाके।
मन के मनौती संग आसीस पाबो, सरन म सेवा बजाके।।
चार पहर बर आये रहिथे, चरन म माथ नवाबो।
आगे तिहार सुरूति, गौरा बिहाव रचाबो।।
साहित्यकार अमित कुमार
गाड़ाघाट-पाण्डुका, गरियाबंद






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