छत्तीसगढ़ी के लिए पुरानी राजधानी से वर्तमान राजधानी तक की पदयात्रा करके 1 लाख हस्ताक्षर संग्रह करने का करेंगें अभियान
हाईकोर्ट में 3-4 पिटीसन के संकल्प की सहमति पर वर्चुवल बैठक सम्पन्न
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम एवं राजकाज की भाषा बनाने के लिए कई संगठन अब आरपार की लड़ाई के मुड में है और इसकी बानगी आज हुये वर्चुवल बैठक में देखने को मिली जब इसमें शामिल हुये लगभग सभी सदस्यों ने वर्तमान राज्य सरकार पर छत्तीसगढ़ी के विकास को लेकर मंथर गति आक्रोश प्रकट किये ।
छत्तीसगढ़ी को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम बनाने के लिए राज्य सरकार से पिछले 7 वर्षो से लगातार गुहार लगा रही छत्तीसगढ़िया महिला क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष लता राठौर ने कहां कि ये दुर्भाग्य है कि छत्तीसगढ़ में इसकी प्राण छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए हमे उच्च न्यायलय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबुर होना पड़ रहा है । जबकी मुख्यमंत्री जी ने खुद जगदलपुर में घोषणा किये थे कि छत्तीसगढ़ी को माध्यम बनायेंगे जब आज दो वर्ष हो रहे पर उस पर अमल क्यों नही हो रहा है।
वही राजभाषा मंच प्रमुख नंद किशोर शुक्ल ने लगातार जनजागरण की जरुरत पर बल देते हुए एक लम्बी पदयात्रा के लिए छत्तीसगढ़ियों को आगे आने के लिए आह्वान किया । शुक्ल ने कहा कि इस सरकार के आने के बाद छत्तीसगढ़ी के लिए माहौल बना है लेकिन पुर्णरुपेण छत्तीसगढ़ी करण के लिए इसे शिक्षा का माध्यम बनाना होगा तभी बात बनेगी ।
वही बैठक में मुम्बई से जुड़ी रेखा राठौर ने कहा कि महारास्ट्र में अगर 8 लोग एक साथ मिल जाये उसमे दो मराठी लोग है तो वो दोनो मराठी में ही बात करने लगते है लेकिन ऐसी भाषाई प्यार की कमी हमारे छत्तीसगढ़ियो में है और यह भावना छत्तीसगढ़ी में राजकाज एवं पढ़ाई लिखाई होने से ही आ सकती है ।
वही बंगाल से जुडे बबलु वस्त्रकार ने कहा कि बंगाल के अधिकतर सार्वजनिक जगहों , बोर्ड इत्यादी में बंगाली भाषा में ही लिखा रहता है तो छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी मे क्यो नही ?
कार्यक्रम का संचालन करते हुये युवा साहित्यकार अनिल कुमार पाली ने कहां अभी 2-3 दौर की और वर्चुवल बैठक प्रस्तावित है जिसमे छत्तीसगढ़िया समाज से अनेक लोगों को जोडते हुये एक निर्णायक योजना बनायेंगे एवं लॉकडाऊन के हटते ही उस पर अमल करते हुए जमीनी लड़ाई लड़ेंगे।
छत्तीसगढ़ी एम.एम छात्र संगठन से जुड़े ऋतु राज साहू ने कहाँ की अब लड़ाई न्यापालिका के माध्यम से लड़ेंगे जिसके लिए एक टीम बना कर दस्तावेज इकट्ठा किया जाना चाहिए ताकि मजबूती से छत्तीसगढ़ी भाषा को अनुसूची में जोड़ने के लिए कोर्ट जा सकें।
इस बैठक में बिलासपुर सें संध्या सिंह , महिला क्रांति सेना से सरोज ठाकुर , ऋचा वर्मा रायपुर, सुनीता हनुमंता रायपुर जिला अध्यक्ष, अरूणा वर्मा दुर्ग जिला अध्यक्ष ,प्रिया जिला संयोजक बलौदाबाजार भाटापारा,लक्ष्मी नाग जिला अध्यक्ष कोरिया, चातुरी नंद बसना जिला प्रभारी, पिलेश्वरी साहू सोशल मीडिया प्रभारी रायपुर,प्रमिला वर्मा रायपुर, रीता राजगीर बिलासपुर, रायपुर से पत्रकार वैभव बेमेतरिया , छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के रविन्द कौशिक , नीतीश बंजारे व छत्तीसगढ़ी एम.ए. संगठन से रितुराज साहु, ओम चन्दवंशी, गड़रिया समाज से गोविंदा पाली , श्रीवास समाज से शैलु श्रीवास , यादव समाज से राजकुमार समेत करीब 45 शीर्ष पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।





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