आँखी रहत अंधरा...छत्तीसगढ़ म अब्बड़ चले हे... बाँटो अउ राज करो...divide and rule- Anil kumar pali

 आँखी रहत अंधरा...छत्तीसगढ़ म अब्बड़ चले हे... बाँटो अउ राज करो...divide and rule


क्रांतिकारी लेख मोर कलम ले..क्रांतिकारी विचारधारा के संग।


आँखी रहत अंधरा अगर कोनो ल कहिबो त ओमा सबले पहली हमर नाव आही... छत्तीसगढ़िया मन के...मैं सब्बो छत्तीसगढ़िया ल नइ कहत हव...तभो ले अब्बड़ से अब्बड़ झन तो एमा आही जही...काबर के पुरखा मन कहे हवय दूसर के गलती ले देख के सिखव...तभो ले हमन अपने आँखी म देखे रहिथन ओखरो बाद गलती करथन...अंग्रेज मन भारत म आइन त उंखर सबले बड़े हथियार रहिस हे....फुट डालो अउ शासन करो...जेला छत्तीसगढ़िया मन अपन आँखी ले देखें हे ओखर गवाह रहें हे... अउ हमर पुरखा मन तो वो बेरा ल अपन करेजा म लोहा ल उतार के सब्बो पीरा ल सहे हे.. तभो ले हमन नइ सीखेन, आँखी म देखे ल भुला के रेंगत हन अउ डबरा म जा के बोजात हन, अइसे हाल होगे हे अभी के बेरा छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़िया मन के।

एक दाई के दु लईका संग म रहिथे लड़थे झगड़थे फेर मिल जथे... त हमन काबर आँखी वाला अंधरा बन के बइठे हन...कतका कहत हे... छत्तीसगढ़िया सोंच रखने वाला मनखे मन... हम सब एक महतारी के लईका हवन... जात-पात के करव बिदाई छत्तीसगढ़िया भाई-भाई...फेर हमन कहाँ मानने वाला हन...कान म तो ठेठा बोजाये हे... अउ मन म घलोक, ऐखरे बर इंहा हमन नइ कहव इंहा छत्तीसगढ़िया कंहु, जेखर जरही त जरन दें..छत्तीसगढ़िया कहे भर ले कोनो छत्तीसगढ़िया नइ हो जावय... अंग्रेज मन सव बछर भारत म रही के भारत के नइ हो सकीन त जेखर जरही तेन मन कहाँ के छत्तीसगढ़िया, अउ एही मन छत्तीसगढ़ ल जाति,धर्म के नाव म कुटी-कुटी काटत हे, तभो ले हमला ए नइ दिखत हे, हमन एक महतारी के लईका होके एक राज म रही के एक नइ हो सकत हन, परबुधिया मन कब समझी की अपन समाज ल अपन जाति ल कुटी-कुटी बांट के कभू विकास नइ कर सकव...छत्तीसगढ़ महतारी के लईका छत्तीसगढ़िया मन जब तक एक नइ होही तब तक दूसर प्रदेश के मनखे मन इंहा लोटा ले के आही अउ राज करत रही..अउ हमन जाति धरम के नाव म बंट के वइसने के वइसने रही जाबो।


जेन भी मनखे ल अपन छत्तीसगढ़ ऊपर गर्व हे तेन मनखे मन थोड़कीं बाबा के बूटी सूंघ के अंतर ध्यान हो कि विचार करहु की हमन ल छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया बोल के लाली पॉप चुचरे बर दे देहे अउ हमन ओही ल धर ल चुप हो जाथन... अउ नशा उतर जही त विचार करहु त समझ आही की जेन राज म उंहा के भाखा म गोठियाय बर लजात हन...जेन राज ल बनाए बर जेन पुरखा मन अपन परान दे हे तिखर नाव चिन्हा कोनो जगह नइ मिले...जेन राज म महतारी भाखा म पढ़ाई लिखाई बर झगरा करें ल लगत हे तभो ले पढ़ाई नइ होवत हे त कइसे छत्तीसगढ़िया हन हमन.... अइसे छत्तीसगढ़िया कहीथन अपन आप ल जिंहा नेता मंत्री जादा ले जादा दूसर राज ले आए मनखे मन हवय...जिन्हा व्यपारी दूसर राज से आए मनखे हे... जिन्हा लुटेरा दूसर राज से आए मनखे हवय...जिन्हा कमावत दूसर राज के मनखे मन हवय... अउ अब तो इंहा किसान घलोक दूसर राज के मनखे मन बनत जात हे... इंहा के रहईया मनखे मन के भुइँया ल बिसात हे अउ बिसा नइ सकत हे त कब्जा करत हे, तभो ले हमन कहिथन छत्तीसगढ़िया सब ले बढ़िया, कंहा हे छत्तीसगढ़िया मन, अपन फ़सल बरबाद होए म फंदा म झूलत हे, बेरोजगारी झेलत हे, अपन पुरखा के भुइँया ल बेचत हे, जाति के नाव म लड़त हे, रोजी-मजदूरी कर के अपन लईका के पेट भरत हे.. अउ अपन महतारी के आँसू ल पियत बइठे हे मुड़ी म हाथ धर के...।। छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया।।


जोहार छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़िया अब बघवा बन के दहाड़व रे...।
घर म खुसरे कुकुर के मुड़ी पकड़ के उखाडव रे...।
माटी के करजा चुकाय के बेरा आगे हे...।
हांथ म हसिया धर के परदेशिया के मुड़ी नवाव रे...।


युवा कवि साहित्यकार, समाज सेवी
अनिल कुमार पाली छत्तीसगढ़िया
तारबाहर बिलासपुर




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