हमर छत्तीसगढ़ धान कटोरा,धरती भूईयाँ सबो हरियागे हरियर लुगरा म करके सिंगार,दाई बनके हरेली आगे।।

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     🌱दाई बनके हरेली आगे 🌱

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हमर छत्तीसगढ़ धान कटोरा,धरती भूईयाँ सबो हरियागे 

हरियर लुगरा म करके सिंगार,दाई बनके हरेली आगे।।


सावन के रिम-झिम पानी,खेती खार सबो अघागे ।

खचवा डबरा तरिया नदिया,जम्मो के जीव जुडागे ।

लहलाहवत धनहा के धान,देख किसान मन हरियागे ।

हरियर लुगरा म करके सिंगार,दाई बनके हरेली आगे।।


सावन महिना हरियर रंग,धरती दाई ल सजाये ।

करिया बादर बरखा रानी,घटा सावन के लाये ।

पड़की परेवना सुआ मैना,मया के रंग म सबो रंगागे ।

हरियर लुगरा म करके सिंगार,दाई बनके हरेली आगे ।


गरज गरज के बरसे पानी, लगगे थरहा होगे बियासी 

लहलहावय धनहा के धान,फूलगे चिरईयाँ ऊगे काशी 

हरियर रहय दाई के अंचरा,पुरवईया ह नीक लागे 

हरियर लुगरा म करके श्रृंगार, दाई बनके हरेली आगे। 

 

मन कुलकत आगे हरेली,खपाबोन गेड़ी खुशी मनाबोन

बरसा के राजा सावन संग,जुर मिल के मया बगराबोन

रुख राई के पुरवईया ,सावन के रंग भावन लागे ।

हरियर लुगरा म करके सिंगार,दाई बनके हरेली आगे।।


छत्तीसगढ़ के पहली तीहार,माटी बन्दव करव जोहार।

नागर बैईला तुतारी खुमरी,हंसिया टंगिया रापा कुदरी।

करंव आरती पाँव पखारँव,आये हरेली भाग जागे ।

हरियर लुगरा म करके सिंगार,दाई बनके हरेली आगे ।।

  


✒️- अनिल जाॅगडे

     (सरगांव मुंगेली )

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