कविता- सुनता के जोत जलाबोन, कवि अनिल जांगडे जी सरगांव मुंगेली छत्तीसगढ़

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        सुनता के जोत जलाबोन 

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गाँव-गाँव अऊ गली-गली म,सुनता के जोत जलाबोन 

नवा किरण संग नवा गाँव बर , रस्ता  नवा  बनाबोन ।


सुनता म बड़ ताकत कइथें, बन  के हम  देखाबोन 

भाग सकय झन कोनो बैरी,अइसन जाल बनाबोन 

टूटे फूटे घर कुरिया ल,चलव जुरमिल के सजाबोन 

नवा किरण संग नवा गाँव बर,रस्ता ल नवा बनाबोन ।


जनम  धरे  हन  ये  माटी  म, माटी  बर मर  जाबोन 

दूध पिये हन महतारी के ,करजा ल अपन चुकाबोन

झन मरय कोनो भूखा-प्यासा,माटी म अन्न उपजाबोन 

नवा किरण संग नवा गाँव बर,रस्ता ल नवा बनाबोन। 


साथ मिल के हाथ बटावव, भाग ल अपन जगावव 

रोक सकय झन कोनो हमला, अइसन रीत बनावव 

गिरे  परे  हपटे  सबो ल,संग  म  अपन  रेंगाबोन 

नवा किरण संग नवा गाँव बर,रस्ता ल नवा बनाबोन ।


झन गड़य कोनो गोड़ म काँटा,रस्ता ल सुघर बनाबोन 

दीन-दुखिया के सेवा करके, जियत  पुण्य  कमाबोन 

फूल  चंदैनी  गोंदा  कस,दुरिहा  ल  बड़  ममहाबोन 

नवा किरण संग नवा गाँव बर,रस्ता ल नवा बनाबोन 



✒️ कवि- अनिल जांगडे जी

      सरगांव मुंगेली छत्तीसगढ़

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