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सुनता के जोत जलाबोन
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गाँव-गाँव अऊ गली-गली म,सुनता के जोत जलाबोन
नवा किरण संग नवा गाँव बर , रस्ता नवा बनाबोन ।
सुनता म बड़ ताकत कइथें, बन के हम देखाबोन
भाग सकय झन कोनो बैरी,अइसन जाल बनाबोन
टूटे फूटे घर कुरिया ल,चलव जुरमिल के सजाबोन
नवा किरण संग नवा गाँव बर,रस्ता ल नवा बनाबोन ।
जनम धरे हन ये माटी म, माटी बर मर जाबोन
दूध पिये हन महतारी के ,करजा ल अपन चुकाबोन
झन मरय कोनो भूखा-प्यासा,माटी म अन्न उपजाबोन
नवा किरण संग नवा गाँव बर,रस्ता ल नवा बनाबोन।
साथ मिल के हाथ बटावव, भाग ल अपन जगावव
रोक सकय झन कोनो हमला, अइसन रीत बनावव
गिरे परे हपटे सबो ल,संग म अपन रेंगाबोन
नवा किरण संग नवा गाँव बर,रस्ता ल नवा बनाबोन ।
झन गड़य कोनो गोड़ म काँटा,रस्ता ल सुघर बनाबोन
दीन-दुखिया के सेवा करके, जियत पुण्य कमाबोन
फूल चंदैनी गोंदा कस,दुरिहा ल बड़ ममहाबोन
नवा किरण संग नवा गाँव बर,रस्ता ल नवा बनाबोन
✒️ कवि- अनिल जांगडे जी
सरगांव मुंगेली छत्तीसगढ़





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