भाई-बहनी के मया राखी के धागे कवि अनिल जांगड़े

 राखी के धागे 
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सावन में मनभावन लागे, राखी  का  त्यौहार 

राखी के धागों में बंधा है ,भाई बहन का प्यार ।


प्यार छुपा है इन राखी में ,धागों में मोती जड़ा है

सोना चाँदी से भी ज्यादा,सुन्दर रिश्तो से गड़ा है

श्रावण मास लेकर आया,देख राखी का त्यौहार 

राखी के धागों में बंधा है , भाई बहन का प्यार । 


राखी के संग चंदन रोली, दीप के थाल साजे 

करे आरती टीका बंदन,  हाथ  में  राखी  बांधे 

बहन न मांगे धन दौलत,मांगे रक्षा का उपहार 

राखी के धागों में बंधा है, भाई बहन का प्यार । 


राखी के धागों का भईया,एक दिन मोल चुकाना 

रक्षा करना इस बहन का,तुम भूल कहीं न जाना 

घर-आँगन में खुशियां बरसे,आये जीवन में बहार 

राखी के धागों में बंधा है,भाई  बहन  का  प्यार। 

 

सब रिश्तों से पावन लगता,भाई बहन का नाता 

बांधे प्यार धागों में बहना, मन हर्षित हो जाता 

भाई बहन का अटूट बंधन,सब जाने जग संसार 

राखी के धागों में बंधा है, भाई  बहन का  प्यार 


🖊️अनिल जांगडे 

  सरगांव मुंगेली छत्तीसगढ़

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