बेटी के जिनगी बर्बाद करत हे... मइके के जुराव

 बेटी के जिनगी बर्बाद करत हे... मइके के जुराव




कोनो भी मनखे ल जीवन म एक संगी के संग के जरूरत पढ़थे, जेखर ले जियत भर ले एक दूसर के संग अपन सुख-दुख बांट के जिए जा सकें, अइसने पवितर डोरी म बंधे बर दु अनजान मनखे देवता के आघु म किरिया खा के दु ले एक हो जथे, अउ कई जनम तक एक दूसर के संग नइ छोड़े के किरिया खा के अपन नवा रददा के संग नवा जीवन के सुरुवात करथे। 

तभो ले कुछु रिश्तेदार अउ मइके के बुद्धि ले रेंगें के कारण पुरखा देवता के किरिया खा के एक होए नवा जोड़ी मन ऐखर शिकार हो जाथे, अउ मया के बनाए मड़वा ह पुलिस थाना कोर्ट कचहरी के आघु पाछु घुमत घुमत सिरा जाथे, जेखर जिम्मेदार दु दिन बर दिखाए के मया करने वाले मइके पक्ष के चटुवा रिश्तेदार मन होथे जिखर गोठ म आके नवा दुल्हन ह अपन सिंदूर ल दाव म लगा देथे। 

हमर दाई ह बचपन ले एक गोठ सिखाए हे, की जिनगी म कोनो ह कोई काम नइ आए, काम आथे त तै जिनगी ले का सीखे हस, कतना कमाए हस, कतना अपन बर सकेले हस, तोर मेर जतना चीज रही तोर सम्मान उतना बने रही त अपन आप ल अपन संघर्ष से अपन विचार से हमेशा मजबूत रखहु। 

हमर दाई के बताए ये गोठ ह ए आलेख के चिंतन म एकदम फिट बइठथे काबर की दूसर के कहे गोठ अउ दूसर के रेंगें रददा म रेंगबे त उन्हेंच पहुँचबे जिन्हा वो मनखे ह तोला लेजाना चाहवत हे, ओखर से आघु नई बढ़ सकस, अब कहीं सीढ़िया चढ़ा दिहि त सीढ़िया चड़बे, अउ कंही गड्ढा म गिरा दिहि त गड्ढा म गिरबे।



                युवा कवि साहित्यकार
                  अनिल कुमार पाली
          तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़



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