नर्मदा दाई के उदगर असथान म लगथे
बेलासपुर के सबले बड़का बेलपान के
मेला
बेलासपुर जिला ले लगभग दस कोस के दुररिह म तखतपुर तहसील बसे हवय तेखर ले थोड़किन दुरिहा म लगे गांव हवय जेला बेलपान गाँव के नाव ले जाने जाथे, जिन्हा के मानता हवय की इंहा ले छत्तीसगढ़ के छोटे नर्मदा दाई के उदगर होए हवय अउ इंहा ले रेंग के तीर-तखार के गाँव तक बोहाथे, बेलपान ले नर्मदा नदिया के रूप म उधगर होके थोड़ा आघु बोहाय के बाद मनियारी नदी म जाके समाहित होए के बाद आघु बढ़त अपन रूप ल मनियारी नदी के रूप म ले लेथे, इँहा के तीर तखार म रहइया गांव के मनखे मन मनियारी नदी ल घलोक नर्मदा नदिया के जइसे पवितर नदिया मानथे, नदिया के अतका मानता हवय तेही ल देख के कइ बछर पहली इँहा के सियान मन एही नदिया ल पवितर मान के जेन मनखे सिरा के बैकुंठ धाम चलदेथे तेखर हाड़ा ल घलोक एही नदिया म बोहा देवय।
नर्मदा नदी के उदगार असथान ल गाँव वाले मनखे मन के बढ़ आस्था घलोक कई बछर ले जुड़े चले आत हे, जेखर ले इंहा के परसीध-पवितर असथान म "माघी-पुन्नी" के अब्बड़ बड़का बेलपान के मेला भराथे, बेलपान गांव ले उदगर नर्मदा कुण्ड के तीर म भगवान शिव जी के बढ़ सुघ्घर मंदिर हे, जिखर तीर-तखार म पाछु कई बछर पहली अब्बड़ अकन बेल के रुख जागे रहे, अउ एही अब्बड़ अकन बेल के रुख जागे के सेती ये गांव के नाव बेलपान पढ़ीस जेखर संग गाँव ल बेलपान गांव के नाव ले जाने लगीन, बेल पान बेल के रुख अउ पाना बेल के पतरी ये दुनो नाव ह मिल के बेलपान गांव के नाव बनिस, अउ बेल रुख के महतम एखर बर जादा हे कि एखर पत्ती ह महादेव भोलेनाथ ल अब्बड़ सुघ्घर लगथे, तेखरे सेती एला भगवान शिव म चढ़ाथे अउ ओखर पूजा करथे, तेखरे सेती ये असथान ह बेल के पाना अउ बूढा देव नाव ल परसिध हे, इँहा के असथान म एके संग दाई छोटे नर्मदा के उदगर भगवान शिव के मंदिर अउ भगवान शिव के पसंदीदा बेल के रुख तीनो हवाए।
नर्मदा नदी के उदगार असथान ल गाँव वाले मनखे मन के बढ़ आस्था घलोक कई बछर ले जुड़े चले आत हे, जेखर ले इंहा के परसीध-पवितर असथान म "माघी-पुन्नी" के अब्बड़ बड़का बेलपान के मेला भराथे, बेलपान गांव ले उदगर नर्मदा कुण्ड के तीर म भगवान शिव जी के बढ़ सुघ्घर मंदिर हे, जिखर तीर-तखार म पाछु कई बछर पहली अब्बड़ अकन बेल के रुख जागे रहे, अउ एही अब्बड़ अकन बेल के रुख जागे के सेती ये गांव के नाव बेलपान पढ़ीस जेखर संग गाँव ल बेलपान गांव के नाव ले जाने लगीन, बेल पान बेल के रुख अउ पाना बेल के पतरी ये दुनो नाव ह मिल के बेलपान गांव के नाव बनिस, अउ बेल रुख के महतम एखर बर जादा हे कि एखर पत्ती ह महादेव भोलेनाथ ल अब्बड़ सुघ्घर लगथे, तेखरे सेती एला भगवान शिव म चढ़ाथे अउ ओखर पूजा करथे, तेखरे सेती ये असथान ह बेल के पाना अउ बूढा देव नाव ल परसिध हे, इँहा के असथान म एके संग दाई छोटे नर्मदा के उदगर भगवान शिव के मंदिर अउ भगवान शिव के पसंदीदा बेल के रुख तीनो हवाए।
बेलपान के मेला इँहा के नर्मद उदगर कुण्ड के तिर म भराथे, इँहा के परसिध बूढ़ादेव मंदिर अब्बड़ जुन्ना हे जेला बनाए के बुता मराठा सासक बिम्बजी भोसले ह कराये रहीस हे। बेलपान के कुण्ड म सब्बो बछर हजारों मनखे मन नहाएं ल आथे, जुन्ना परम्परा के माने के अनुसार इँहा के मानता हवय कि जेन मनखे मन इँहा के कुण्ड म नहाथे, उखर काया ले जुड़े सब्बो बीमारी ह मिटा जाथे, एखर सेती सब्बो बछर मनखे मन पूरा सरधा के संग इँहा आथे, अउ मेला के आनद ले के कुण्ड म नहाथे, कुण्ड के तीर म परसिध शीतलपूरी बाबा के समाधि अस्थान हे, अइसे माने जाथे की शीतलपूरी बाबा ह इँहा जीयत समाधि ले रहिस हे, अउ ओखरे बलाए म छोटे नर्मदा दाई ह आए रहिस हे, वोही जुन्ना बछर ले इँहा के नर्मदा कुण्ड ह परसिध हवय। बेलपान के लगने वाला मेला म बढ़ परसिध होए के कारण बेलासपुर, तखतपुर अउ ओखर तीर-तखार के रहईया सब्बो गांव के मनखे इँहा के मेला म घूमे ल आथे संग म अपन जरूरत के समान मेला ले बिसाथे, गांव मन म गरमी के बेरा म होवइया बिहाव के जोरन के साज-समान मनखे मन इही मेला ले बीसा लेथे थे।
युवा कवि साहित्यकार
अनिल कुमार पाली,
तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो.न.-7722906664




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