महतारी के मया कमरछठ तिहार महतारी ह अपन लइका के मया अउ लइका के सुग्घर आशीष, सुखी जीवन के खातीर जउँन उपास रहिथे ओला कमरछठ तिहार के नाँव ले जाने जाथे। कतको झन ये तिहार ल हलषट्ठी नाँव ले तको जाने जाथे। हलषट्ठी येखर सेती कहिथे!काबर कि श्री कृष्णा भगवान के बड़े भाई बलराम जी के जनम इही दिन होय रिहिस हे। श्री कृष्णा के बड़े भाई बलराम ह हल ल अपन संगी समझथे अउ अपन संगे- सँग धारण करके चलथे उँखर सेती ये तिहार ल हलषट्ठी नाँव ले जानथे।कमरछठ तिहार के दिन महतारी बहिनी मन अउ जम्मो उपसनिन मन सुग्घर मउँहा डारा के दतवन करथे।अउ गाँव के बिच बस्ती मे जम्मो उपसनिन म…
कमरछठ - दाई दिही आसीस लईका के सुग्घर स्वास्थ बर,दाई रही उपास। छे जात के भाजी संग, खाही पसहर के भात।। नारी जात बर महतारी बने के खुशी ए जग के ओकर सबले बड़का खुशी आए। महतारी नइ बन पाए के दुःख अउ महतारी बने के सुख के अनुभव एक नारी ही कर सकथे। जेन नारी के कोनो लईका नइ राहय ओला बंजर भूइंयाँ कस देखे जाथे।समाज म किसम-किसम के गोठ होथे।ठड़गी बाँझ अउ न जाने का का नाव धरे जाथे। कमरछठ तिहार भादो अंधियारी पाख म छठ के दिन मनाये जाथे। कतको मनखे हा हलषष्ठी ल कमरछठ कहिके संघेर देथे अउ बधाई देथे फेर छत्तीसगढ़ म तो हमन कमरछठ ही मनावत आवत हन…
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