फागुन बीन मयारू के फागुन बीन मयारू के फागुन म सब फाग गीत गुनगुना थे..। रंग-गुलाल खीसा म धरे-धरे..।, एक-दूसर ल रंग लगाथे..। संगी-संगवारी मन नाचत-गावत होरी मनात हे..। अंगना म आगी बार के..। दाई मीठ-मीठ पकवान बनाथे..। तैं कहाँ लुकागे हस मोर चंदा रानी..। तोला रंग लगाये बर मोर मन ललचाथे..। धमक-धमक बाजत नंगड़ा-बाजा के धुन ह..। तोर बर मया के गीत सुनावत हे..। रही-रही के मोला घेरी-बेरी रंग गुलाल ह तोर सुरता देवता हे..। बइठे-बइठे तोर रददा जोहत..। माहुर कस नसा मन ल मतात हे..। तैं कब आबे मोर मयारू..। तोला रंग लगाये बर मोर मन ललचात हे..। …
होलिका दाई मेर भेंट …!! चला होलिका दाई मेर भेंट करे जाई…! छेना संग जरो देबो अपनो बुराई…!! फागुन के पुन्नी कस अंजोर रहय मन बिना भेदभाव के बुकाय रहय तन गुलाल बुक-बुक के रंग म नहाई…! छेना संग जरो देबो अपनो बुराई…!! चला होलिका दाई मेर भेंट करे जाई…! लोभ हर जरोवत हावय दया अऊ ममता सोच हर सनात हे नसात हे मानवता छल छिद्र होगे आजकाल चतुराई…! छेना संग जरो देबो अपनो बुराई…!! चला होलिका दाई मेर भेंट करे जाई…!! धरम के मरम ल मनखे भुलात हे सरल प्रहलाद मन ले जम्मो के नंदात हे कब तक जरोबो प्रहलाद होलिका दाई…! छेना संग जरो देबो अपनो बुराई…!! कवि- जोहन भार्ग…
(होली गीत) घेरी-बेरी पोता!! घेरी-बेरी पोता मुँह गाल पोता…! अंग-अंग रंग अऊ गुलाल पोता…!! पाँच छेना ले के पहिली भेंट करब जाय काम क्रोध लोभ अहंकार जरि जाय दोष अवगुन होली म हो रीता…! अंग-अंग रंग अउ गुलाल पोता…!! बरती दीया के अंजोर सबके घर रहय अंधियार कहूँ न कोनो के डर तन-मन धन ले रहव सुभित्ता…! अंग-अंग रंग अउ गुलाल पोता…!! दिल मिले चाही जो रपोटे के हे साध दुख-सुख म घलो धरव अंगठी हाथ होली के तिहार झन रहय फीक्का…! अंग-अंग रंग अउ गुलाल पोता…!! जोहन करय विनती सुनव संगी नसा करव न काम लंदी-फंदी पी के एती-…
(होली गीत) अंग-अंग रंग म भीगा ले…!! अंग-अंग रंग म भीगा ले सजनिया…! आजा पिचकारी के मज़ा ले सजनिया…!! लाल-लाल परसा के फूल प्रेम रंग ए मिले बिन पीरा गड़े शूल प्रेम रंग ए थोर-थोर काँटा हटा ले सजनिया…! आजा पिचकारी के मजा ले सजनिया…!! जवानी काये मीना बजार मोर जान अंग-अंग मेवा-मिठाई के दूकान मेवा-मिठाई ल चिखा ले सजनिया…! आजा पिचकारी के मजा ले सजनिया…!! धक-धक धड़कत दिल अउ धड़क जाय गीला सुक्खा लकड़ी होली म धधक जाय काँड़ी संग माचिस घिसा ले सजनिया…! आजा पिचकारी के मजा ले सजनिया…!! दुनिया के डर लोकलाज ल भूला के मिल नदी संग नदिया बन के समा के मिल …
होली कविताओं वाली आरुग पत्रिका में होली के विषय पर लिखी अपनी आलेख कविता भेजे आप की सबसे अच्छी रचना को समाचार पत्र और पोर्टल में प्रकाशित किया जाएगा। आप अपनी स्वरचित कविता, कहानी, आलेख (हिंदी/छत्तीसगढ़ी/भोजपुरी) में भेज सकतें है, सबसे अच्छी कविता को उत्कृष्ट सम्मान भी दिया जाएगा। नाम- पता- मोबाईल नंबर- रचना विधा- संपर्क- 7722906664 केवल वाट्सऐप के माध्यम से। ईमेल- aarugnews@gmail.com कोई भी जानकारी प्राप्त करने के लिए https://anilpali.blogspot.com/?m=1 का अवलोकन करें।
© Copyright 2020 by AARUG News live bilaspur & All Right Reseved
Social Plugin