हिंदी मेरी भाषा
मीठी मेरी हिंदी भाषा,
जन-जन के मन को भाती।
उत्तर से दक्षिण तक,
सभी संस्कृति में समा जाती।
गौरव गाकर वीरों का,
सुंदर सा राग सुनाती।
भारत मां के सपूतों को,
गर्व की अनुभूति कराती।
मीठी मेरी हिंदी भाषा.......।
हर कवियों के पन्नों पर,
प्यार भरा रंग छोड़ जाती।
मधुर-मिठास बोली में,
सब जगह छा जाती है।
सूर संगीत और संस्कृति में,
अपना हर बात मनवाती।
सुंदर मधुर गीतों में,
सबके मन को है भाती।
मीठी मेरी हिंदी भाषा..........।
प्रारंभ से अंत तक,
भारत के गुणगान गाती।
देशों और विदेशों में अपना एक,
अलग ही पहचान बनाती।।
मीठी मेरी हिंदी भाषा सदा ही,
वीरों के मुख की शोभा बढ़ाती।
एक डोर में बांधकर सभी,
भाषाओं का सम्मान कहलाती।
मीठी मेरी हिंदी भाषा,
जन-जन के मन को भाती।
सभी भाषाओं से अच्छी
मुझे मेरी हिंदी भाषा ही आती।
कवि- अनिल कुमार पाली,
तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो.न:- 7722906664, 7987766416
ईमेल- anilpali635@gmail.com






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