कोन जनी कती बर गवागे ओ दिन
होत बिहनिया छेना म आगी मगाई
छरा छिटका अऊ घर अंगना मताई
धान कुटईया ओ ढेकी जाता के दिन
कोन जनी कती बर गवागे ओ दिन।
गोड़ के हरपा अऊ बाबा के सटका
रऊत के लाठी पनिहारीन के मटका
गांव गवई के बोईर बहेरा के जिन
कोन जनी कती बर गवागे ओ दिन।
पेड़ तरी सुघ्घर सब खेलन भटकऊला
जुर मिल जहुरिया खेलन गिल्लीडंडा
सांप धरईया अऊ ओ सवरा के बिन
कोन जनी कती बर गवागे ओ दिन।
लकडी के बने सुघर रेचुल ढेलवा
बईला चरई संग संग डंडा कोल ऊवा
आला बंगाला अटकन बटकन के दिन
कोन जनी कती बर गवागे ओ दिन।
स्कूल ल आके ओ तरिया तउडाई
भौरा बाटी कागज के पतंग उड़ाई
पैरा कुदाई ओ दौरी बेलन के दिन
कोन जनी कती बर गवागे ओ दिन।
गदगदहा चिला अऊ खपरा के रोटी
गुलेल के निशाना ओ माटी के गोटी
खेलन घरघुदिया पुतरी पुतरा के दिन
कोन जनी कती बर गवागे ओ दिन।
बाबा के बोली अऊ ओ हंसी ठिठोली
किस्सा कहानी दाई के गुरतुर बोली
फुगडी खेलाई खिल खिलावत ओ दिन
कोन जनी कती बर गवागे ओ दिन।
राहस लीला अऊ ओ नाचा नचाई
बेदरा भालू देख एक जगह सकलाई
हंसत हंसावत ओ जोकर पड़ी के दिन
कोन जनी कती बर नदागे ओ दिन
कोला बारी के ओ दिन ताका तकाई
खमरा खुरमी अऊ आगी भुररी तपाई
माटी के हडिया ओ चटनी बासी के दिन
कोन जनी कती बर नदागे ओ दिन
कोन जनी कती बर गवागे ओ दिन।।





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