जीवनी सुरुज बाई खाण्डे जी
छत्तीसगढ़ के माटी म घलोक संस्करीति साहित्य अउ कला बसे हे... छत्तीसगढ़ के अइसे कोनो भी कोंटा नइ होही जिन्हा लोक गीत, लोक गायन, लोक कला, लोक परम्परा, कहनी नइ होही।
अइसने म हमर छत्तीसगढ़ के सांस्करीति के लोक गाथा भरथरी ल पूरा देश-दुनिया म बगरइया हमर पुरखा दाई सुरुज बाई खाण्डे जी के गोठ मैं आप मन ल बतावत हव।
दाई सुरुज बाई खाण्डे ह छत्तीसगढ़ के धरोहर हवय जेन ह छत्तीसगढ़ के सांस्करीति ल लोकगीत ल छत्तीसगढ़िया मन के मया ल पूरा देश-दुनिया म अपन गायन शैली के माध्यम से बगराये हे।
दाई सुरुज बाई खाण्डे जी के जनम 12 जून 1949 म किसान परिवार म श्री घसिया धृतलहरे जी के इंहा गांव- पौंसरी तहसील बिल्हा जिला बिलासपुर म होये रहिस हे। कहिथे की गुनी मनखे के गुन नान पन ले दिखे लगथे, वइसने ही सुरुज बाई खाण्डे जी ह नान पन ले गुनी रहिस हे, जेन मन ल अपन इस्कूल के ग्यान नइ मिले के बाद भी लईका पन ले गुनवनती रहिस हे,अउ अपन कला संगीत के ग्यान म बढ़ ग्यानी रहिस हे।
सात बछर के उमर म जब सुरुज बाई खाण्डे जी ह अपन नाना राम सहाय संग भरथरी गीत गाये ल सुरु करिस त कोनो नइ जानत रहिस हे कि ये लईका ह बड़े हो के अपन नाव ल पूरा देश बिदेस म बगरा दीही अउ अपन छत्तीसगढ़ राज के नाव ल आघु बढाही, सुरुज जी ह नानपन ले ही बढ़ चंचल अउ समझदार रहिस हे, नाना राम सहाय ले भरथरी गीत के संगे-संग ढ़ोला मारू,चंदैनी,आल्हा उदल गीत घलोक सीख डाले रहिस हे।
छोट कन परिचय:-
नाव- सुरुज बाई खाण्डे
ददा के नाव- श्री घसिया घृतलहरे जी
माता के नाव- श्रीमती रेवती बाई जी
पति के नाव- श्री लखन लाल खाण्डे जी
कला गुरु- नाना श्री रामसाय जी
पुरखवती गांव- पौंसरी तहसील बिल्हा जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़
ससुराल गांव - कछार बिलासपुर छत्तीसगढ़
शिक्षा- इस्कूल नइ गे रहिन
सुरुज_बाई_खाण्डे के जी के भरथरी गीत गाये के शैली-
भरथरी गीत ल सारंगी, एकतारा के संग म योगि मन के संग घूम घूम के गाये जाथे, येही योगी मन के गाये ले ये गीत के विधा ह सब्बो मनखे के तीर म पहुँचीस अउ येही गीत ल सुरुज बाई खण्डे जी ह अपन गुरु नाना राम सहाय जी ले सीखिस, सुरुज बाई खाण्डे जी ह भरथरी के गीत ल वेदमती शैली म ( बईठ के गाना) अउ कापालिक शैली ( खड़े हो के गाना) दुनु म बढ़ सुग्घर तरीका ले गावय।।
अपन गायन शैली म निपुण हो के जइसे सुरुज जी ह अपन युवा अवस्था म पहुँचीस त उंखर बिहाव श्री लखन लाल खाण्डे जी के संग गांव कछार जिला बिलासपुर म होइस, अउ दुनो ये डोरी म बंधा गे, लखन लाल खाण्डे जी ह येक अच्छा कलाकार रहिस हे, दुनो कलाकार के बिहाव होये के बाद दुनो ल अपन बिहाव के बंधना के संगे-संग कला के बंधना ल अब्बड़ दिन तक बांधे रखने वाला साथी मिल गे। अउ ये बिहाव के मेल के संग ये बात ह सिद्ध होंगे कि येक कलाकार ही ह येक कलाकार के बने सम्मान कर सकथे।
श्री लखन लाल खाण्डे जी ह पहली ले लोक गीत अउ पंथी नृत्य में विद्वान रहिस हे, जेख बाद सुरुज बाई खाण्डे जी ह लखन लाल खाण्डे जी ल अपन भरथरी, ढ़ोला मारू,चंदैनी,आल्हा उदल जइसे कला सीखा के अपन गायन शैली ल जगह-जगह बगराये के बुता करिस।
अपन बिहाव के बाद दुनो कलाकार जोड़ी मन संग म मिल के अपन गायन शैली ल अउ निखारे बर लगातार गीत गाये के अभयास करत रहें, येखर संग म अपन गायन शैली ल आघु बढ़ाये बर अपन गायन पार्टी बनाइन अउ जिहा गाये के मौका मिलिस उंहा भरथरी गीत ल गा के अपन गायन पार्टी ल आघु बढ़हइन।
अउ जइसे-जइसे अपन गायन शैली ल आघु बढ़ात गिन वइसे-वइसे लोगन मन सुरुज बाई खाण्डे जी ल भरथरी गीत कलाकार के नाव ले जाने लगिन। अपन गायन शैली म सुरुज बाई खाण्डे जी के जगह-जगह नाव बगरे के बाद पहली घव मंच म गाये के मौका रतनपुर के मेला म मिलिस। अउ आघु चल के सुरुज बाई खाण्डे जी ह भरथरी गायन शैली म येक मात्र महान गायिका बनिस। ओखर बाद अपन भरथरी गायन शैली म परषिधि मिले से लोगन मन सुरुज बाई खाण्डे ल बड़का-बड़का मंच दे बर नइ चुकीन, जेमा मध्यप्रदेश के संगे-संग दिल्ली,कोलकाता,राजस्थान, अहमदाबाद, नागालैंड, इलाहाबाद,जोधपुर,मुंबई,मद्रास, जइसे अउ दूसर राज मन म घलोक अपन गायन शैली ल बगराये के अवसर मिले लगिस । आदिवासी लोक कला परिषद के कोती ले सुरुज बाई खाण्डे जी ल विदेश (रूस)म आयोजित 'भारत मोहत्सव' म अपन भारती संस्करीति लोक कला ल बगराये के अवसर मिलिस जेमा अपन गायन शैली ले पूरा बिस्व म भारत देश के नाव रोशन करिस।
भरथरी के परिचय
भरथरी ह येक लोक गाथा गायन शैली हवय, जेमा राजा भरथरी अउ रानी पिंगला के जीवन ले जुड़े कथा हवय, भरथरी गीत ल नागपंथी गायक मन जादा गाथे, ये गाथा ह पूरा भारत देश म दंत कथा के रूप म बगरे हे, जेला लोक गीत म नाटक के संग गीत गायन कर मंच म प्रस्तुत करथे। छत्तीसगढ़ ले सुरुज बाई खाण्डे जी ह भरतरी गीत म प्रशिद्ध गायिका रहिस हे, अउ छत्तीसगढ़ी भाखा के करुण रस म ये गीत के गायन करें।
परषिध भरथरी गीत
घोड़ा रोवय घोड़सार मा,घोड़सार मा वो,
हाथी रोवय हाथीसार मा
मोर रानी ये वो,महलों मा रोवय
मोर रानी ये या,महलों मा रोवय
मोर राजा रोवय दरबार मा,दरबार मा,
दरबार मा,भाई ये दे जी.....||
भरथरी ल गाये के बेरा म उपयोगी वाध यंत्र जइसे
हारमोनियम,तबला,बेंजो,बाँसुरी,मजीरा अउ खँजरी के उपयोग होथे |
भरथरी गायन बर वेशभूषा अउ आभूषण
गीत गायन बर कलाकार मन गीत के मंचन करे के पहली बढ़ सुग्घर ढंग ले छत्तीसगढ़ी पोशाक ल पहिन के गायन के प्रस्तुति देवय।
भरथरी गायन बर सुरुज बाई खाण्डे जी ह विशेष रूप ले इलियास लुगरा ल पहिने, लुगरा के संग म छत्तीसगढ़ी संस्करीति ल संजोये बर पुतरी,बहुंटा,नागमोरी,चुरी,करधन,बिछिया,तोड़ा,पैरी,रूपिया,येठी,सूर्रा,ककनी,नथनी,झूमका,बाली जइसे आभूषण मन ल पहिने । ये सब्बो आभूषण मन छत्तीसगढ़ी संस्करीति के परंपरा गत चलने वाला आभूषण हवय। जेखर से छत्तीसगढ़ ह अपन वेश भूषा म पूरा देश म अलग पहिचान बनाथे।
सुरुजबाई के संग देवइया कलाकार
1.लखन लाल खाण्डे - मजीरा,घुँघरू,नृत्य करना और मुख्य रागी का काम करते थे |
2.शिवनंदन खरे एवं माखन साहू - हारमोनियम वादक
3.हरप्रसाद रात्रे एवं रामहरि साहू -तबला वादक
4.राजू रात्रे,जवाहर बघेल और उमेश सिहोते - बाँसुरी वादक
सम्मान
सोवियत संघ रूस सन् 1987-88 मा भारत के लोकगीत भरथरी के प्रतिनिधित्व गायन करीन त उंहा आप के सम्मान होइस |
मुख्य सम्मान : -
1995 म SECL कला सम्मान ले सम्मानित होइन।
2001 मा मध्यप्रदेश सरकार ह देवी अहिल्या बाई सम्मान ले सम्मानित करिस |
2006 मा छत्तीसगढ़ सरकार ह स्व. देवदास बंजारे स्मृति सम्मान ले सम्मानित करिस |
2006 मा राम चन्द्र देशमुख बहुमत सम्मान ले सम्मानित होइन |
2010 मा राष्ट्रीय उद्योग व्यापार मेला म सम्मान होइस।
2010 मा भास्कर वुमन ऑफ द ईयर अवार्ड ले सम्मानित होइन|
2010 मा बिसाहू दास महंत अउ कला साधना सम्मान ले सम्मानित होइन।
टिस्को जमशेदपुर अउ जिला पत्रकार संघ द्वारा सम्मानित होइन |
चक्रधर समारोह रायगढ़ ले सम्मानित होइन |
नौकरी
सुरुज बाई खाण्डे जी के कला के क्षेत्र में परषिद होये के बाद लोककला कार के तौर म किये बुता ल सहारे बर लोककला कार के रूप मा एस.ई.सी.एल बिलासपुर मा कला संयोजक के पद म कुछ बछर तक बुता करीन, फेर मोटर सायकल में दुर्घटना होये के बाद नौकरी नइ कर पाइन, अउ नौकरी ले सेवानिवृत्त होंगे।
मृत्यु
गुरू घासीदास जयंती 18 दिसंबर के बेरा म गुरु घासीदास विश्वविद्यालय कोनी बिलासपुर म सुरुज बाई खाण्डे जी ल अतिथि के रूप म नेवता दिये रहिस हे, जेमा आखरी बार सुरुज बाई खाण्डे जी ह मंच म अकेला भरथरी गीत के गायन करे रहिस हे, अउ अपन गायन ले सब्बो दर्शक के मन ल मोह ले रहिस हे। येखरे बाद 10 मार्च 2018 को येक कलाकार ह अपन नाव ल दुनिया म बगरा के ये दुनिया ल छोड़ के चल दिस। पहली के होये सड़क हादसा म सुरुज जी ह कमजोर हो गे रहिस हे जेखर कारण अचानक दिल के दौरा पड़े ले उंखर मौत होंगे। अउ परमात्मा के संग जा के मिल गे।
छत्तीसगढ़ी संस्करीति लोक कला लोक गीत म सुरुज बाई खाण्डे जी के बहुत बड़े योगदान हवय, जेखर से छत्तीसगढ़ के नाव ह पूरा देश विदेश म उज्वल होये हे...
1.भरथरी गीत गवइया पहली महिला हवय सुरुज खाण्डे जी ह।
2. सुरुज बाई खाण्डे जी ह भरथरी गीत ल बईठ के अउ खड़े हो के दुनो विधा गावय।
3.सुरुज बाई खाण्डे जी ह सुरमोहनी लोक कला मंच के निर्माण कर के भरथरी गीत के संगे-संग ढ़ोला मारू,आल्हा उदल,चंदैनी पंथी जइसे सब्बो लोक गीत ल आघु बढ़ाये हे।
4. भरथरी लोकगीत ल जीवित रखें बर बिलासपुर म श्री लखन लाल खाण्डे,श्रीमती सोहारा बाई खाण्डे एवं भिलाई ले लोक कलाकार कुमारी वंदना अउ भोपाल म लोक कलाकार द्वारिका प्रसाद जी मन ल लोककला गीत सिखाइन |
5. भरथरी गीत ल परषिधि देवाये के अउ सब्बो मनखे तक बगराये के सबले बड़े बुता सुरुज बाई खाण्डे जी ह करें हे।
युवा कवि साहित्यकार
अनिल कुमार पाली,
तारबाहर जिला-बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो.न- 7722906664, 7987766416
ईमेल-anilpali635@gmail.com
अइसने म हमर छत्तीसगढ़ के सांस्करीति के लोक गाथा भरथरी ल पूरा देश-दुनिया म बगरइया हमर पुरखा दाई सुरुज बाई खाण्डे जी के गोठ मैं आप मन ल बतावत हव।
दाई सुरुज बाई खाण्डे ह छत्तीसगढ़ के धरोहर हवय जेन ह छत्तीसगढ़ के सांस्करीति ल लोकगीत ल छत्तीसगढ़िया मन के मया ल पूरा देश-दुनिया म अपन गायन शैली के माध्यम से बगराये हे।
दाई सुरुज बाई खाण्डे जी के जनम 12 जून 1949 म किसान परिवार म श्री घसिया धृतलहरे जी के इंहा गांव- पौंसरी तहसील बिल्हा जिला बिलासपुर म होये रहिस हे। कहिथे की गुनी मनखे के गुन नान पन ले दिखे लगथे, वइसने ही सुरुज बाई खाण्डे जी ह नान पन ले गुनी रहिस हे, जेन मन ल अपन इस्कूल के ग्यान नइ मिले के बाद भी लईका पन ले गुनवनती रहिस हे,अउ अपन कला संगीत के ग्यान म बढ़ ग्यानी रहिस हे।
सात बछर के उमर म जब सुरुज बाई खाण्डे जी ह अपन नाना राम सहाय संग भरथरी गीत गाये ल सुरु करिस त कोनो नइ जानत रहिस हे कि ये लईका ह बड़े हो के अपन नाव ल पूरा देश बिदेस म बगरा दीही अउ अपन छत्तीसगढ़ राज के नाव ल आघु बढाही, सुरुज जी ह नानपन ले ही बढ़ चंचल अउ समझदार रहिस हे, नाना राम सहाय ले भरथरी गीत के संगे-संग ढ़ोला मारू,चंदैनी,आल्हा उदल गीत घलोक सीख डाले रहिस हे।
छोट कन परिचय:-
नाव- सुरुज बाई खाण्डे
ददा के नाव- श्री घसिया घृतलहरे जी
माता के नाव- श्रीमती रेवती बाई जी
पति के नाव- श्री लखन लाल खाण्डे जी
कला गुरु- नाना श्री रामसाय जी
पुरखवती गांव- पौंसरी तहसील बिल्हा जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़
ससुराल गांव - कछार बिलासपुर छत्तीसगढ़
शिक्षा- इस्कूल नइ गे रहिन
सुरुज_बाई_खाण्डे के जी के भरथरी गीत गाये के शैली-
भरथरी गीत ल सारंगी, एकतारा के संग म योगि मन के संग घूम घूम के गाये जाथे, येही योगी मन के गाये ले ये गीत के विधा ह सब्बो मनखे के तीर म पहुँचीस अउ येही गीत ल सुरुज बाई खण्डे जी ह अपन गुरु नाना राम सहाय जी ले सीखिस, सुरुज बाई खाण्डे जी ह भरथरी के गीत ल वेदमती शैली म ( बईठ के गाना) अउ कापालिक शैली ( खड़े हो के गाना) दुनु म बढ़ सुग्घर तरीका ले गावय।।
अपन गायन शैली म निपुण हो के जइसे सुरुज जी ह अपन युवा अवस्था म पहुँचीस त उंखर बिहाव श्री लखन लाल खाण्डे जी के संग गांव कछार जिला बिलासपुर म होइस, अउ दुनो ये डोरी म बंधा गे, लखन लाल खाण्डे जी ह येक अच्छा कलाकार रहिस हे, दुनो कलाकार के बिहाव होये के बाद दुनो ल अपन बिहाव के बंधना के संगे-संग कला के बंधना ल अब्बड़ दिन तक बांधे रखने वाला साथी मिल गे। अउ ये बिहाव के मेल के संग ये बात ह सिद्ध होंगे कि येक कलाकार ही ह येक कलाकार के बने सम्मान कर सकथे।
श्री लखन लाल खाण्डे जी ह पहली ले लोक गीत अउ पंथी नृत्य में विद्वान रहिस हे, जेख बाद सुरुज बाई खाण्डे जी ह लखन लाल खाण्डे जी ल अपन भरथरी, ढ़ोला मारू,चंदैनी,आल्हा उदल जइसे कला सीखा के अपन गायन शैली ल जगह-जगह बगराये के बुता करिस।
अपन बिहाव के बाद दुनो कलाकार जोड़ी मन संग म मिल के अपन गायन शैली ल अउ निखारे बर लगातार गीत गाये के अभयास करत रहें, येखर संग म अपन गायन शैली ल आघु बढ़ाये बर अपन गायन पार्टी बनाइन अउ जिहा गाये के मौका मिलिस उंहा भरथरी गीत ल गा के अपन गायन पार्टी ल आघु बढ़हइन।
अउ जइसे-जइसे अपन गायन शैली ल आघु बढ़ात गिन वइसे-वइसे लोगन मन सुरुज बाई खाण्डे जी ल भरथरी गीत कलाकार के नाव ले जाने लगिन। अपन गायन शैली म सुरुज बाई खाण्डे जी के जगह-जगह नाव बगरे के बाद पहली घव मंच म गाये के मौका रतनपुर के मेला म मिलिस। अउ आघु चल के सुरुज बाई खाण्डे जी ह भरथरी गायन शैली म येक मात्र महान गायिका बनिस। ओखर बाद अपन भरथरी गायन शैली म परषिधि मिले से लोगन मन सुरुज बाई खाण्डे ल बड़का-बड़का मंच दे बर नइ चुकीन, जेमा मध्यप्रदेश के संगे-संग दिल्ली,कोलकाता,राजस्थान, अहमदाबाद, नागालैंड, इलाहाबाद,जोधपुर,मुंबई,मद्रास, जइसे अउ दूसर राज मन म घलोक अपन गायन शैली ल बगराये के अवसर मिले लगिस । आदिवासी लोक कला परिषद के कोती ले सुरुज बाई खाण्डे जी ल विदेश (रूस)म आयोजित 'भारत मोहत्सव' म अपन भारती संस्करीति लोक कला ल बगराये के अवसर मिलिस जेमा अपन गायन शैली ले पूरा बिस्व म भारत देश के नाव रोशन करिस।
भरथरी के परिचय
भरथरी ह येक लोक गाथा गायन शैली हवय, जेमा राजा भरथरी अउ रानी पिंगला के जीवन ले जुड़े कथा हवय, भरथरी गीत ल नागपंथी गायक मन जादा गाथे, ये गाथा ह पूरा भारत देश म दंत कथा के रूप म बगरे हे, जेला लोक गीत म नाटक के संग गीत गायन कर मंच म प्रस्तुत करथे। छत्तीसगढ़ ले सुरुज बाई खाण्डे जी ह भरतरी गीत म प्रशिद्ध गायिका रहिस हे, अउ छत्तीसगढ़ी भाखा के करुण रस म ये गीत के गायन करें।
परषिध भरथरी गीत
घोड़ा रोवय घोड़सार मा,घोड़सार मा वो,
हाथी रोवय हाथीसार मा
मोर रानी ये वो,महलों मा रोवय
मोर रानी ये या,महलों मा रोवय
मोर राजा रोवय दरबार मा,दरबार मा,
दरबार मा,भाई ये दे जी.....||
भरथरी ल गाये के बेरा म उपयोगी वाध यंत्र जइसे
हारमोनियम,तबला,बेंजो,बाँसुरी,मजीरा अउ खँजरी के उपयोग होथे |
भरथरी गायन बर वेशभूषा अउ आभूषण
गीत गायन बर कलाकार मन गीत के मंचन करे के पहली बढ़ सुग्घर ढंग ले छत्तीसगढ़ी पोशाक ल पहिन के गायन के प्रस्तुति देवय।
भरथरी गायन बर सुरुज बाई खाण्डे जी ह विशेष रूप ले इलियास लुगरा ल पहिने, लुगरा के संग म छत्तीसगढ़ी संस्करीति ल संजोये बर पुतरी,बहुंटा,नागमोरी,चुरी,करधन,बिछिया,तोड़ा,पैरी,रूपिया,येठी,सूर्रा,ककनी,नथनी,झूमका,बाली जइसे आभूषण मन ल पहिने । ये सब्बो आभूषण मन छत्तीसगढ़ी संस्करीति के परंपरा गत चलने वाला आभूषण हवय। जेखर से छत्तीसगढ़ ह अपन वेश भूषा म पूरा देश म अलग पहिचान बनाथे।
सुरुजबाई के संग देवइया कलाकार
1.लखन लाल खाण्डे - मजीरा,घुँघरू,नृत्य करना और मुख्य रागी का काम करते थे |
2.शिवनंदन खरे एवं माखन साहू - हारमोनियम वादक
3.हरप्रसाद रात्रे एवं रामहरि साहू -तबला वादक
4.राजू रात्रे,जवाहर बघेल और उमेश सिहोते - बाँसुरी वादक
सम्मान
सोवियत संघ रूस सन् 1987-88 मा भारत के लोकगीत भरथरी के प्रतिनिधित्व गायन करीन त उंहा आप के सम्मान होइस |
मुख्य सम्मान : -
1995 म SECL कला सम्मान ले सम्मानित होइन।
2001 मा मध्यप्रदेश सरकार ह देवी अहिल्या बाई सम्मान ले सम्मानित करिस |
2006 मा छत्तीसगढ़ सरकार ह स्व. देवदास बंजारे स्मृति सम्मान ले सम्मानित करिस |
2006 मा राम चन्द्र देशमुख बहुमत सम्मान ले सम्मानित होइन |
2010 मा राष्ट्रीय उद्योग व्यापार मेला म सम्मान होइस।
2010 मा भास्कर वुमन ऑफ द ईयर अवार्ड ले सम्मानित होइन|
2010 मा बिसाहू दास महंत अउ कला साधना सम्मान ले सम्मानित होइन।
टिस्को जमशेदपुर अउ जिला पत्रकार संघ द्वारा सम्मानित होइन |
चक्रधर समारोह रायगढ़ ले सम्मानित होइन |
नौकरी
सुरुज बाई खाण्डे जी के कला के क्षेत्र में परषिद होये के बाद लोककला कार के तौर म किये बुता ल सहारे बर लोककला कार के रूप मा एस.ई.सी.एल बिलासपुर मा कला संयोजक के पद म कुछ बछर तक बुता करीन, फेर मोटर सायकल में दुर्घटना होये के बाद नौकरी नइ कर पाइन, अउ नौकरी ले सेवानिवृत्त होंगे।
मृत्यु
गुरू घासीदास जयंती 18 दिसंबर के बेरा म गुरु घासीदास विश्वविद्यालय कोनी बिलासपुर म सुरुज बाई खाण्डे जी ल अतिथि के रूप म नेवता दिये रहिस हे, जेमा आखरी बार सुरुज बाई खाण्डे जी ह मंच म अकेला भरथरी गीत के गायन करे रहिस हे, अउ अपन गायन ले सब्बो दर्शक के मन ल मोह ले रहिस हे। येखरे बाद 10 मार्च 2018 को येक कलाकार ह अपन नाव ल दुनिया म बगरा के ये दुनिया ल छोड़ के चल दिस। पहली के होये सड़क हादसा म सुरुज जी ह कमजोर हो गे रहिस हे जेखर कारण अचानक दिल के दौरा पड़े ले उंखर मौत होंगे। अउ परमात्मा के संग जा के मिल गे।
छत्तीसगढ़ी संस्करीति लोक कला लोक गीत म सुरुज बाई खाण्डे जी के बहुत बड़े योगदान हवय, जेखर से छत्तीसगढ़ के नाव ह पूरा देश विदेश म उज्वल होये हे...
1.भरथरी गीत गवइया पहली महिला हवय सुरुज खाण्डे जी ह।
2. सुरुज बाई खाण्डे जी ह भरथरी गीत ल बईठ के अउ खड़े हो के दुनो विधा गावय।
3.सुरुज बाई खाण्डे जी ह सुरमोहनी लोक कला मंच के निर्माण कर के भरथरी गीत के संगे-संग ढ़ोला मारू,आल्हा उदल,चंदैनी पंथी जइसे सब्बो लोक गीत ल आघु बढ़ाये हे।
4. भरथरी लोकगीत ल जीवित रखें बर बिलासपुर म श्री लखन लाल खाण्डे,श्रीमती सोहारा बाई खाण्डे एवं भिलाई ले लोक कलाकार कुमारी वंदना अउ भोपाल म लोक कलाकार द्वारिका प्रसाद जी मन ल लोककला गीत सिखाइन |
5. भरथरी गीत ल परषिधि देवाये के अउ सब्बो मनखे तक बगराये के सबले बड़े बुता सुरुज बाई खाण्डे जी ह करें हे।
युवा कवि साहित्यकार
अनिल कुमार पाली,
तारबाहर जिला-बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो.न- 7722906664, 7987766416
ईमेल-anilpali635@gmail.com





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