रंगों का त्यौहार- युवा कवि साहित्यकार श्री अनिल कुमार पाली जी की कविता हिंदी में

 रंगों का त्यौहार 



मन को लुभा दे, ऐसा उपकार बनो,

सुंदर तन को सजाएं ऐसा श्रृंगार बनो,

आओ आज तुम मेरे आंगन में,

फिर मेरे होली का गुलाल बनो। 


नीले,लाल,गुलाबी रंगों को संग ले कर,

आज का तुम मेरा त्यौहार बनो,

जैसे रंगी है राधा श्याम सुंदर के रंग में,

तुम भी प्रिये मेरे प्रेम के रंग में रंगों। 


बन के नई उमंग मेरे जीवन की,

रंगों से भरी खुशियां हर बार बनो,

आगया है होली के रंगों का त्यौहार,

अब तुम मेरा सारा संसार बनो। 


भर के रंगों के संग प्रेम पवित्र,

मेरी पिचकारी का तुम बौछार बनो,

सुंदर रंगों को संग लेकर आई है होली,

आओ तुम अब मेरे रंगों की पहचान बनो।


युवा कवि साहित्यकार

श्री अनिल कुमार पाली जी

तारबाहर जिला-बिलासपुर छत्तीसगढ़

मो.न:- 7722906664,7987766416

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