होली लोकगीत
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आनी बानी के रंग गुलाल,चारो डहर छागे
फागुन के फाग खेले रंग बसंती आगे।
लाली फूले परसा ह ,दुरिहा ल चिनहांत हे
पियर रंग सरसो फूले, देख गेहूं बऊरात हे
रूख राई डारा पाना-------2
अपन रंग म हरियागे
फागुन के फाग खेले ,रंग बसंती आगे।
घम-घम ल मौंरे आमा,सेम्हर फूल इतरात हे
कुहकी मारे कारी कोयली, जीव ल जलात हे
गुन गुनावत भौंरा देख ------2
मन मोरो बऊरागे
फागुन के फाग खेले, रंग बसंती आगे।
पड़की परेवना सबो, फागुन गीत गात हें
सुआ मैना बईठ अमरईया,मन ल मिलात हें
महुँआ के रस पिये-----2
देख जहुरिया मतागे
फागुन के फाग खेले, रंग बसंती आगे
आनी बानी के रंग गुलाल चारो डहर छागे।
🖊️अनिल जांगडे सरगांव मुंगेली





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