क्षेत्रीय विकास के लिए क्षेत्रीय पार्टी की है आवश्कता
अब छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढियावादी सरकार चाही।
कइसे अउ कटहु...भुलाहु झन, जब टंगिया के बेठ छोलात छोलात एक दिन सिरा जाथे त, फेर टंगिया ह नवा बेठ म अपन जुगाड़ देख के सेट हो जाथे, अउ अपन काटे के बुता ल फेर सुरु कर देथे, एही होवत हवय छत्तीसगढ़िया मन के संग दूसर ल पंदोली देवत-देवत अपन निचट छत्तीसगढियावाद अस्तित्व ल भुला जात हे। अउ दूसर के बहकावा म आके उंखरे पाछु-पाछु रेंगें ल धर लेथे। छत्तीसगढ़िया मन सब्बो गोठ ल बने सुग्घर समझते फेर ये गोठ ल काबर नइ समझे कि जब तक चुनाव जीते बर राष्ट्रीय पार्टी वाले मन ल छत्तीसगढ़िया मनखे के जरूरत रहिथे तब तक छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया कहिथे, अउ कहीं चुनाव जीत जाथे कोनो पद मिल जाथे त अपन राज्य के मनखे मन ल छत्तीसगढ़ म लाके इंहा के निवासी बना देथे रोजगार पद सब्बो म दूसर राज के मनखे ल खुसेर देथे तहँ ले एक सबले बड़े शब्द अपन गांठ ले छोर के छत्तीसगढ़ म बगराथे.. जेला कहिथे "छत्तीसगढ़ तो मिनी भारत आए" "छत्तीसगढ़ ह छोटे बंगाल हे" हम छत्तीसगढ़िया बिहारी हवन, येही सब करत-करत छत्तीसगढ़िया मनखे ल दीमक असन चरत-चरत अपन राजनीती ल गरम करथे। अब बतावव ये कइसे छोटे बंगाल होंगे? कईसे मिनी भारत होंगे? का महाराष्ट्र म अइसने होथे? बंगाल म छोटे छत्तीसगढ़ बसे हे? आंध्रप्रदेश म दक्षिण छत्तीसगढियावादी क्षेत्र बसे हे? नइ बसे हे काबर की दूसर राज के मनखे मन अपन राज के बोली भाखा ल संस्करीति ल पहली प्राथमिकता देथे, अभी भी सुधरे के मौका हे छत्तीसगढ़िया मनखे मन ल नइ तो इंहा से छत्तीसगढ़ियावाद सिरा जही, छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ राज रही फेर छत्तीसगढ़िया राज नइ रहे। अरे तथा कथित माटी पुत्र होवा दूसर राज्य ल देखव आप संस्करीति परंपरा ल बचाये बर कोनो बाहरी मनखे ल अपन राज म घुसरे ल नइ देवय अपन धरती के एक छोटकन टुकड़ा तक छुवन नइ दें, अउ एक इंहा के मन हवय बाहरी मनखे ल नेता बना डालथे, सबले पहली ये जाने के जरूरत हवय की कोई मनखे ह छत्तीसगढियावादी हवय अउ कोन मनखे ह छत्तीसगढ़ ल दीमक असन चटईया हवय।
बुता करे के पारी हे,जांगर झन चोराव रे..।
छत्तीसगढ़ महतारी हे लईका.. महतारी के मान बढ़ाव रे..।
नोचत हे दाई के कोरा ल,अइसने मनखे ल आगी लगवा रे।
छत्तीसगढ़ के लईका बने हव त, महतारी के लाज बचावव रे।
आँखी गढ़िया के देखे जेन ह, बाज सही झपटा मारव रे।
छत्तीसगढ़ के माटी खातिर, लहू एमा बोहाव रे।।
युवा कवि साहित्यकार
अनिल कुमार पाली, तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो.न:- 7722906664
बुता करे के पारी हे,जांगर झन चोराव रे..।
छत्तीसगढ़ महतारी हे लईका.. महतारी के मान बढ़ाव रे..।
नोचत हे दाई के कोरा ल,अइसने मनखे ल आगी लगवा रे।
छत्तीसगढ़ के लईका बने हव त, महतारी के लाज बचावव रे।
आँखी गढ़िया के देखे जेन ह, बाज सही झपटा मारव रे।
छत्तीसगढ़ के माटी खातिर, लहू एमा बोहाव रे।।
युवा कवि साहित्यकार
अनिल कुमार पाली, तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो.न:- 7722906664





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