पावन मंच- सादर नमन विश्व आदिवासी दिवस कवि अनिल जांगड़े

 पावन मंच-  सादर नमन 
विश्व आदिवासी दिवस 



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जंगल झाड़ी प्रकृति के पुजारी 

जय हो जय जोहार आदिवासी 

धरती दाई के तँय अगुवा बेटा 

तैय भूईयाँ के हस मूलनिवासी। 

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जंगल झाड़ी पाहड पर्वत 

प्रकृति के तैय रखवार 

जीव-जंतु के रक्षा करइया

हवस तैय धनुषधार

रूख राई के सेवा करइया

तोला कइथँय बनवासी 

तँय भूईयाँ के हस मूलनिवासी ।


फल फूल अऊ कंद मूल के 

हवव औषधि के दाता 

नदियाँ नरवा झोरखा झरना

हवय सबो संग नाता

भेद भाव कपट नई जाने 

रइथें बनके सन्यासी 

तँय भूईयाँ के हस मूलनिवासी। 


जल जंगल अऊ जमीन भाई

तोरे कारन म हांसत हे 

धरती के तँय अगुवा बेटा 

सब तोरे जस गावत हें 

जाँगर टोरे गाँव बस्ती बसाये 

नई लागे तोला थकासी 

तँय भूईयाँ के हस मूलनिवासी। 


तोर रिति  संस्कृति भईया

जग म अलग पहचान हे 

रूख राई तोर देवी देवता 

तोर बुढ़ादेव  महान हे 

सुआ ददरिया कर्मा के धून

झूम झूम नाचे होके दासी 

तँय भूईयाँ के हस मूलनिवासी। 


विश्व आदिवासी दिवस के आप सबो झन ल गाड़ा गाड़ा बधाई। 

     🙏🏼जय जोहार



🖊️अनिल जांगडे  सरगांव मुंगेली

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