छत्तीसगढ़ी भासा के पीरा कब सिराही रे ?
हमर छत्तीसगढ़ राज ल बने 21 बछर पुर गे हे, अउ अतका बछर पूरे के बाद घलोक जइसे जइसे बेरा ह आघु बढ़हीस त छत्तीसगढ़ के संस्करीति,भासा,सम्मान ह घलोक आघु बढ़तीस अइसे होना रहिस हे ऐखर ले उल्टा छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़िया संस्करीति कला ल मिटा के दूसर राज के सांस्करीति बोली भासा ल छत्तीसगढ़ के मुड़ी म ल के खपलत हे, ए कोनो नवा गोठ नोहे कि पहली बेरा छत्तीसगढ़ म गुजराती भासा ल पढ़ाए के गोठ होए हे, ऐखर ले पहली घलोक छत्तीसगढ़ म ओड़िया भासा पढ़ाए के पहल होए हे अउ कईठन भासा हे जेला छत्तीसगढ़ म बढ़ावा दे बर शासन के संग बाहिर ले आए मनखे मन जोर सोर से प्रचार करथे, एही गोठ ल छत्तीसगढ़िया मनखे मन ल समझे ल लगही की अपन भासा संस्करीति ल दूसर परदेश के मनखे मन कइसे छत्तीसगढ़ म लाके बईठावत हे, जेखर से छत्तीसगढ़ के जुन्ना संस्करीति भासा ह विलुप्त होवत जात हे, अइसने बने रही त अवइया बछर म छत्तीसगढ़ मिनी भारत तो बन जही लेकिन हमर पुरखा के देखे सुंदर छत्तीसगढ़ के सपना ह मिटा जही जिन्हा आरुग छत्तीसगढ़िया संस्करीति कला के पूछईया कोनो नइ रही ।
छत्तीसगढ़िया मनखे ल ए सब्बो गोठ ल देख के अपन भासा संस्करीति बर जागे ल लगही अपन भासा अपन संस्करीति अपन माटी के मया ल जब तक जगाहु नइ त दूसर राज के मनखे मन छत्तीसगढ़ म कमाए खाए के संग इंहा अपन कला संस्करीति ल अतना बगरा डररी की समेटत-समेटत पूरा जिनगी पहा जही अभी भी बेरा हवय छत्तीसगढ़िया मन मेर जागे के अउ अपन छत्तीसगढ़ महतारी ल बचाए के।
जागव रे जागव बागी बलिदानी मन- लक्षमण मस्तुरिया जी
युवा कवि साहित्यकार
अनिल कुमार पाली
तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़




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