लोकगीत मँय छत्तीसगढ़ महतारी अँव- कवि अनिल जांगड़े

 

लोकगीत

मँय छत्तीसगढ़ महतारी अँव

🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾


छत्तीसगढ़ मँय पावन माटी

गाँव-गँवईं के चिनहारी अँव 

मँय भुईयां धान कटोरा रे 

छत्तीसगढ़  महतारी  अँव ।


मँय सोनहा भुईयां धान कटोरा

छत्तीसगढ़ के माटी अँव 

जनम देवइया करम लिखइया

सुख-दुख के साथी अँव 

मँय खेलत डंडा भौंरा बाटी

लईका के किलकारी अँव 

मँय भुईया धान कटोरा रे

छत्तीसगढ़  महतारी  अँव ।

मँय अरपा पैरी शिवनाथ

मँय महानदी के पानी अँव 

खेत खार मँय डोली धनहा

नाँगर बइला किसानी अँव

बनिहार भूथियार किसान के

मँय माटी संगवारी अँव

मँय भुईयां धान कटोरा रे

छत्तीसगढ़  महतारी  अँव ।


मँय सुआ ददरिया कर्मा रे

मोर भाखा गुरतुर बोली हे 

मँय नाचा बाजा मेला मड़ई

मोर सुघ्घर हंसी ठिठोली हे 

मोर अंचरा के छंइया भुइयां

घर अंगना मॅंय दुवारी अँव 

मँय भुइयां धान कटोरा रे

छत्तीसगढ़ महतारी अँव ।

मँय छंइया भुईयां पुरवइया

छत्तीसगढ़ के छाती अँव 

मँय सोना चाँदी हीरा मोती

पुरखा तुंहर  थाथी अँव 

रूख राई मँय जंगल झाड़ी

जीव-जन्तु के हितकारी अँव 

मँय भुईयां धान कटोरा रे

छत्तीसगढ़ महतारी अँव ।


बन भैंसा अऊ पहाड़ी मैना

मोर सुघ्घर चिनहारी हे 

धान के बाली संग हंसिया

मोरे  अमिट  निशानी हे 

माटी म मँय अन्न उपजाथँव

सबो के पालनहारी अँव।

मँय भुईयां धान कटोरा रे

छत्तीसगढ़ महतारी अँव ।


🖊️ अनिल जाँगडे 

      सरगांव मुंगेली छत्तीसगढ़

Post a Comment

0 Comments