दया मया सुनता के
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दया मया सुनता के भइया
घर-घर दीया जलावव
अंधियारी बर पुन्नी के चंदा
बनके अंजोर बगरावव।
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सोनहा माटी माटी के दीया
माटी म घर ल सजावव
सुनता पिरीत धरम के दीया
जुरमिल सबो जलावव
हंसी खुशी म ज़िनगी पहावव
कोनो ल झन सतावव
दया मया सुनता के भइया
घर-घर दीया जलावव।
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तन के दीया म मया के बाती,
जग जग ल करव अंजोर
सुख के सुघ्घर गठरी जोरव
कहना ल मानव मोर
सुमता सुरूज के दीया बारव
भाग ल अपन जगावव
दया मया सुनता के भइया
घर-घर दीया जलावव।
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देख देवारी म धान के बाली
धरती म सोन बगराये हे
होता बिहनीया चारो मुड़ा म
बनके मोती चमकाये हे
चॅंदा चॅंदैनी कस मुस्कावव
हॅंसव सबला हॅंसावव
दया मया सुनता के भइया
घर-घर दीया जलावव।
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गिरे परे हट्टे मनके बर
रददा ल सुघ्घर बनावव
दीन-दुखिया के बनके साथी
संग म अपन रेंगावव
दाई ददा के सेवा ल करके
जियत पुण्य कमावव
दया मया सुनता के भइया
घर-घर दीया जलावव ।
दीपावली की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
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✍️ अनिल जांगड़े
सरगांव मुंगेली




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