छुवाछुत के सराप
मरकी के पानी पीके, अइसे का पाप कर देंव,
जिनगी ल मोर छीन के, मोर तय नास करदे।
पियास लगीस त पानी पीके, अपन पियास जुड़ातेव,
छुवाछुत के ग्यान मोला, तय आघु ले नइ बताते।
तंहू मनखे के जात हस,अउ महुँ लईका जान के,
मरकी के पानी ले, सुखत टोटा(गला) के पियास जुड़ातेव।
मैं का जानतेव, पियास जुड़ाए के छोटे से भूल,
आजे मोर जिनगी के, काल हो जतीस।
छोट जाति के मनखे होके,मरकी ले पानी पिये ले,
मोर जिनगी के नास हो जातिस।
अनिल कुमार पाली
तारबाहर बिलासपुर





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