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खेत खार के डोली धनहा
सोनहा माटी धान कटोरा
महर महर ममहावत हे
खेत खार के डोली धनहा
लहर लहर लहरावत हे ।
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हरियर भूईया सोनहा धान
झुमर झुमर के नाचत हे
सोन बरोबर धान के बाली
खिल खिला के हंसत हे
सुआ मैना पडकी परेवना
सुघर गीत ददरिया गावत हे
खेत खार के डोली धनहा
लहर लहर लहरावत हे ।।
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मोर माटी ये छईया भूईया
चारो कोती ह फरियागे
करम कमई के जागर टोरे
देख किसान मन हरियागे
घोघी फाफा टेटका मेचका
जुर मिल डफली बजावत हे
खेत खार के डोली धनहा
लहर लहर लहरावत हे ।।
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धरती पहिने हरियर लुगरा
देख चँदा सुरुज लजागे
सोनहा धान बगरगे मोती
फूलगे कांशी बरसा हजागे
कोला बारी अंगना दुवारी
जुर मिल जम्मो सजावत हे
सोनहा माटी धान कटोरा
महर महर ममहावत हे
खेत खार के डोली धनहा
लहर लहर लहरावत हे ।।
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कवि- अनिल जाॅगडे (सरगांव मुंगेली )





3 Comments
जम गे गुरुदेव
ReplyDeleteमजा आ गे
ReplyDeleteबहुत बढ़िया 👌👌👌
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