छत्तीसगढ़ी गीत गाँव-गँवाई
गाँव गँवई के धूर्रा माटी
चटनी बासी ह नदागे
पुरखा के सब रीत भुलागें
कइसन जमाना आगे।
खेत जोते बर टेक्टर आगे
नाँगर ह नँदावत हे
धान लुये बर हारवेस्टर आगे
हँसिया ह बिसरावत हे
मेढ मेढवार कोला बारी नईये
दौऊरी बेलन ह नदागे
पुरखा के सब रीत भुलागें
कइसन जमाना आगे।
रापा गैंती कुदरा झँऊहा
मनखे ल गोहरावत हे
सूपा सबके छुटगे संगी
पंखा म धान ओसावत हें
कोठी म अब धान कहाँ हे
मंडी म धान धरागे
पुरखा के सब रीत भुलागें
कईसन जमाना आगे ।
होत बिहनिया सो उठ के
चाय पिये बर देखत हें
बाचे बोरे बासी ल सब
कोटना म आज फेकत हें
अपन बोली भाखा ल छोड़
अंग्रेजी म गोठीआथें
पुरखा के सब रीत भुलागें
कइसन जमाना आगे
🖊️ अनिल जांगडे, सरगांव मुंगेली





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