तहिं मुक्ति के धाम
मरघट मर घटीया शमसान ,तोर कतका सुघ्घर नाम
तोर अंगना म सबो बरोबर ,तहिं मुक्ति के धाम ।
तोर शरन म सबो आथें, राजा रंग फकीर
नई ये दुआ भेदी तोरजग,सब बर ऐके लकीर
तोर कोरा म नई लागय ,भूख प्यास अऊ घाम
तोर अंगना म सबो बरोबर, तहिं मुक्ति के धाम ।
तोर गोदी म जेहर आथे ,छोड़ दुनिया ल जुच्छा
धन दौलत महल अटारी, सोना चाँदी के गुच्छा
जग दुनिया ल पाथें मुक्ति,नई लेवस कुछु दाम
तोर अंगना म सबो बरोबर,तहिं मुक्ति के धाम।
नई चिनहत अमीर गरीब ल,जात पात धरम ल
तोर चरन म आथें सबो ,नई पूछत तैंय करम ल
सबो ल एक दिन जाना हे ,अमर हवय तोर नाम
तोर अंगना म सबो बरोबर, तहिं मुक्ति के धाम।
खाली हाथ आये जग म, खाली हाथ तैय जाबे
जईसन जईसन करम करबे,वईसन फल ल पाबे
चार कांधा चारपाई म आथें,कोन बिहनिया साम
तोर अंगना म सबो बरोबर, तहिं मुक्ति के धाम।
कवि
🖊️ अनिल जांगडे सरगांव मुंगेली





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