रंग हे गुलाल हे
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| होली 2021 |
रंग हे गुलाल हे, आगे फागुन के तिहार हे।
रंग म मोर रंग जा गोरी, तोर बर मया अउ दुलार हे।
लाल-लाल रंग म रंगे, गोरी तोर गाल हे।
दिखे राधा रानी कस, अंग तो कमाल हे।
हरियर हे लाल हे, रानी रंग गुलाल हे।
अंग म अपन रंग ले गोरी,आये फागुन के तिहार हे।
मीठ-मीठ रसमलाई के संग हे,रंग के बोहात धार हे।
तोर अंगना म गोरी, मोर बंधाये बढ़ आस हे।
नवा खवाई के घर म नवा-नवा स्वाद हे।
सब्बो के मन ल भाये, फागुन के राग हे।
रंग के तिहार हे गोरी, मया अउ दुलार हे।
गीत तंहु गुनगुनाबे मोर संग, आये फागुन के तिहार हे।
लईका खेले हे सब्बो रंग म,
अउ बुढ़वा घलोक दिखथे जवान हे।
संगी-संगवारी मन संग जुरिया के, करत बढ़ धुमाल हे।
होली के तिहार म गोरी, माते रंग अउ गुलाल हे।
रंग म तय मोर रंग जा गोरी,आए फागुन के तिहार हे।
होली म गोरी तोर बर मया अउ दुलार हे।।
कविता रचना:-
युवा कवि साहित्यकार
अनिल कुमार पाली, तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो.न.- 7722906664
रंग म मोर रंग जा गोरी, तोर बर मया अउ दुलार हे।
लाल-लाल रंग म रंगे, गोरी तोर गाल हे।
दिखे राधा रानी कस, अंग तो कमाल हे।
हरियर हे लाल हे, रानी रंग गुलाल हे।
अंग म अपन रंग ले गोरी,आये फागुन के तिहार हे।
मीठ-मीठ रसमलाई के संग हे,रंग के बोहात धार हे।
तोर अंगना म गोरी, मोर बंधाये बढ़ आस हे।
नवा खवाई के घर म नवा-नवा स्वाद हे।
सब्बो के मन ल भाये, फागुन के राग हे।
रंग के तिहार हे गोरी, मया अउ दुलार हे।
गीत तंहु गुनगुनाबे मोर संग, आये फागुन के तिहार हे।
लईका खेले हे सब्बो रंग म,
अउ बुढ़वा घलोक दिखथे जवान हे।
संगी-संगवारी मन संग जुरिया के, करत बढ़ धुमाल हे।
होली के तिहार म गोरी, माते रंग अउ गुलाल हे।
रंग म तय मोर रंग जा गोरी,आए फागुन के तिहार हे।
होली म गोरी तोर बर मया अउ दुलार हे।।
कविता रचना:-
युवा कवि साहित्यकार
अनिल कुमार पाली, तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो.न.- 7722906664





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