लोकगीत म फागुन गीत
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चल हाँ आगे तिहार ह फागुन के
अरे आगे तिहार ह फागुन के
रंग डारन दे मन भर के आज
संगी रे आगे तिहार ह फागुन के ।
टेसू के फूल असन, दिखे तोर ओठ
दिखे तोर ओठ, दिखे तोर ओठ
पिये मतौना कस, लागे तोर गोठ
लागे तोर गोठ, लागे तोर गोठ
भर-भर के पिचकारी मारन दे आज
संगी रे आगे तिहार ह फागुन के
रंग डारन दे मन भर के आज।
रंग रंगाले रे, मन ल मिलाले
मन ल मिलाले, रे मन ल मिलाले
महुंआ के रस पिये, जहुंरिया मतागे
जहुंरिया मतागे रे जहुंरिया मतागे
बनके भौंरा मन, तोला खोजय रे आज
संगी रे आगे तिहार ह फागुन के
रंग डारन दे मन भर के आज।
मया पिरीत के सुघ्घर, रंग ल लगाले
रंग ल लगाले रे रंग ल लगाले
संग ह झन छुटय ,किरिया तैय खाले
किरिया तैय खाले रे किरिया तैय खाले
तोला देखे बर जिवरा, मोर तरसय रे आज
संगी रे आगे तिहार ह फागुन के
रंग डारन दे मन भर के आज ।
🖊️अनिल जांगडे सरगांव मुंगेली






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