छत्तीसगढ़ी होली तिहार म बढ़ सुग्घर फाग गीत के मजा- कवि अनिल जांगड़े जी- अरे आगे तिहार ह फागुन के

 लोकगीत म फागुन गीत 

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चल हाँ आगे तिहार ह फागुन के 

अरे आगे तिहार ह फागुन के 

रंग डारन दे मन भर के आज 

संगी रे आगे तिहार ह फागुन के ।


टेसू के फूल असन, दिखे तोर ओठ

दिखे तोर ओठ, दिखे तोर ओठ

पिये मतौना कस, लागे तोर गोठ 

लागे तोर गोठ, लागे तोर गोठ 

भर-भर के पिचकारी मारन दे आज 

संगी रे आगे तिहार ह फागुन के

रंग डारन दे मन भर के आज। 


रंग रंगाले रे, मन ल मिलाले 

मन ल मिलाले, रे मन ल मिलाले 

महुंआ के रस पिये, जहुंरिया मतागे 

जहुंरिया मतागे रे जहुंरिया मतागे 

बनके भौंरा मन, तोला खोजय रे आज 

संगी रे आगे तिहार ह फागुन के 

रंग डारन दे मन भर के आज।

 

मया पिरीत के सुघ्घर, रंग ल लगाले 

रंग ल लगाले रे रंग ल लगाले 

संग ह झन छुटय ,किरिया तैय खाले 

किरिया तैय खाले रे किरिया तैय खाले

तोला देखे बर जिवरा, मोर तरसय रे आज

संगी रे आगे तिहार ह फागुन के 

रंग डारन दे मन भर के आज ।




🖊️अनिल जांगडे सरगांव मुंगेली

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