बस्तर में हुए आदिवासियों के नरसंहार का विरोध छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना द्वारा पूरे प्रदेश में पोस्टर के माध्यम से किया गया-
बिलासपुर । बस्तर क्षेत्र के आदिवासियों द्वारा शांतिपूर्ण रूप से अपन विरोध करते हुवे पुलिस कर्मियों झड़प हों गई इसी बीच पुलिसकर्मियों की गोली का शिकार होकर तीन आदिवासियों की मृत्यु हो गई, साथ ही 50 से ज्यादा आदिवासी लोग धायल हो गए, साथ ही मेरे गए आदिवासियों को पुलिस के द्वारा माओवादी कहा गया है जिसकी कोई जांच सरकार के द्वारा नही की जा रही है आदिवासी समुदाय का कहना है की जो लोग मारे गए थे वह नक्सली नही सामान्य जनता है।
बस्तर के मूल निवासी छत्तीसगढ़िया आदिवासियों के हक अधिकार के लिए आज छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना द्वारा पूरे प्रदेश में पोस्टर के माध्यम से सोशल मीडिया में अपना विरोध दर्ज कराया है साथ ही प्रदेश पदाधिकारियों के आव्हान पर बिलासपुर के पदाधिकारियों द्वारा बस्तर के मूल निवासी छत्तीसगढ़िया आदिवासियों को न्याय नही मिलने पर पूरे प्रदेश में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के द्वारा उग्र आंदोलन किया जाने की चेतावनी दी गई है।
जिला संयोजक शैलू ठाकुर का कहना है कि बस्तर क्षेत्र में इस तरह की घटना से पूरे देश मे छत्तीसगढ़ का नाम खराब हो रहा है जिस पर सरकार को विचार करना चाहिए।
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के जिला उपाध्यक्ष अनिल कुमार पाली का कहना है कि बस्तर क्षेत्र नक्सलियों और सरकार के बीच पीस रहा है जिससे वहां निवास करने वाले आम नागरिकों का जीवन नरक बन गया है, वँहा के निवासी को शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार जैसी सुविधाएं चाहिए लेकिन उन्हें केवल गोली बारूद ही देखने को मिल रहे है।





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