छत्तीसगढ़ी बोली अब भाषा बनने के चरण की ओर बढ़ रहा है, इस प्रोजेक्ट में छत्तीसगढ़ के विभिन्न ज़िलों के प्रबुद्ध वर्ग जुड़े हुए हैं,
बहुत बड़े स्तर कार्य हो रहा है, अब छत्तीसगढ़ की जनता को छत्तीसगढ़ी में हर पहलू पर जानकारी मिल सकेगी, जिसमें शिक्षा, खेतीबाड़ी, वाणिज्य व्यापार, स्वास्थ्य, विज्ञान, शेयर मार्केट, जन जागरूकता समेत नाना प्रकार के विषय में शोध के बाद 11,000 घंटे से भी अधिक का कॉन्टेंट तैयार किया जा रहा है,
सम्पूर्ण प्रोजेक्ट भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर* *एवं पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के अंतर्गत हो रहा है, जिसमें डॉ प्रशांत कुमार घोष जी (परियोजना अन्वेषक) और डॉ हितेश कुमार तिवारी जी (एसोसिएट रिसर्च - छत्तीसगढ़)* जुड़े हुए हैं
जिसमें छत्तीसगढ़ के जानेमाने वाइस आर्टिस्ट और अनुवादक इस काम में लगे हुए है।
अब छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी का स्तर इतने बड़े पैमाने पर ऊपर उठने का समय आ चुका है कि , गर्व से ना केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बाहरी जनमानस भी कह उठेंगे *छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया*
हर प्रकार के विषयों से जुड़ी जानकारी अब छत्तीसगढ़ी में उपलब्ध
भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर और पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के सहयोग से अब छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी बोली भाषा में हो रहा है, बड़े स्तर का काम।





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