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छत्तीसगढ़ी कविता - आगे देवउठनी के दिन सुमिरबो सिरी हरिहर बिष्नु- जोहन भार्गव जी
छत्तीसगढ़ी कविता- प्रेम छुए-टमरे के सउख, मिलभेंट करे बर जावा झन - कवि-  जोहन भार्गव जी सेंदरी बिलासपुर (छ.ग)
करत हाँवव बंदन तोर देसभग्ति भाव ल, खुदीराम बोस के भुलाही बलिदान कोन…? कवि- जोहन भार्गव जी   गड़रिया समाज सेंदरी बिलासपुर ।
ठग-जग जन के बने हे संघ…!  ईंखर करेजा म भरे प्रपंच- कवि- जोहन भार्गव जी  गड़रिया समाज सेंदरी बिलासपुर|
छत्तीसगढ़ी कविता- छाँटे चारा के धुन म छँटेलहा चारा पा गएवँ, वि-जोहन भार्गव  जी  सेंदरी बिलासपुर छत्तीसगढ़