आगे देवउठनी के दिन…!! आगे देवउठनी के दिन सुमिरबो सिरी हरिहर बिष्नु ! चौमास के पुर गे दिन मनाबो सिरी हरिहर बिष्नु !! कातिक अंजोरी पाख एकादस नींद ले जागयँ भगवान लगिन बिहाव मुंडन, संगे-संग गृह-प्रवेश के बिधान बड़ पबरित ए दिन रिझाबो सिरी हरिहर बिष्नु ! चौमास के पुर गे दिन सुमिरबो सिरी हरिहर बिष्नु !! तुलसी दाई ल सिंगार सजावयँ चुरी महाउर बिंदिया मड़वा बनय कुसियार चघावयँ चुनरी फूल बिछिया हरि संग बिहाव के सुदिन सजाबो सिरी हरिहर बिष्नु ! चौमास के पुर गे दिन सुमिरबो सिरी हरिहर बिष्नु !! सुख उन्नति के देवइया सृष्टि के पालनहार योग शक्ति ले पठोवय हर…
प्रेम छुए टमरे के सउख !! प्रेम छुए-टमरे के सउख, मिलभेंट करे बर जावा झन !! ये अंग-अंग के सरसरी ए कोनो ल उकसावा झन…!! मिलय देखे म आँखी ल सुख अनछुए सरीर ल छुए म सुध कुवाँरी काया के अंजोर ल फूँक मार के बुतावा झन ! प्रेम छुए टमरे के सउख, मिलभेंट करे बर जावा झन !! डुहरु असन फूलव छतनार मन भर बगरय तुहँर नार महमहाय के उमर म एको फूलपान छरियावा झन ! प्रेम छुए-टमरे के सउख, मिलभेंट करे बर जावा झन !! दाई-ददा के दुलार हे कर्जा अफ़सर बनव के होय तुहँर चर्चा बिन बिहाव के ए जुड़ाव ले ऊँकर मन कल्लवावा झन ! प्रेम छुए टमरे के सउख, मिलभेंट करे बर जावा झन !! कल…
खुदीराम बोस के भुलाही बलिदान कोन…? करत हाँवव बंदन तोर देसभग्ति भाव ल…! भारत माता बर हारे जिनगी के दाँव ल…!! तीन दिसंबर सन् अट्ठारह सौ नवासी ददा त्रैलोक्यनाथ लक्छमीप्रिया दाई बड़ चमकाए तयँ मिदनापुर गाँव ल…! भारत माता बर हारे जिनगी के दाँव ल…!! पढ़ के नौंवी कक्षा छोड़े आघू के पढ़ाई ल योद्धा बन के लड़े अजादी के लड़ाई ल मुजफ्फरपुर के कांड म उछाले अपन नावँ ल…! भारत माता बर हारे जिनगी के दाँव ल…!! गुलामी ले बढ़ के नोहय रोग कोई जग म कायरता ले बढ़ के पाबे दोष कहाँ जग म बैरी के छाती म धरे बीरता के पाँव ल…! भारत माता बर हारे जिनगी के दाँव ल…!! खुदीर…
ठग-जग जन के बने हे संघ…!! ठग-जग जन के बने हे संघ…! ईंखर करेजा म भरे प्रपंच…!! रोंठ मनखे…पोठ चंदा डाँड़ के पइसा चलही धंधा कपटी मन के साझा मंच…! ईंखर करेजा म भरे प्रपंच…!! काला-काला मैं धूर्त कहवँ चुप रहिके फेर कतेक सहवँ खून अउँटत हे देख के संग…! ईंकर करेजा म भरे प्रपंच…!! पासा चले बर भारी सुजान एक-दूसर बर खुद ए महान टेटका घिरिया कस बदलयँ रंग…! ईंखर करेजा म भरे प्रपंच…!! पहिली कहिन एक मंच म आबो राजनैतिक लाभ उठाबो अब दुहीं समाज ल रहिके संग…! ईंखर करेजा म भरे प्रपंच…!! नागपंचमी के सुभ दिन म दिखीस जहर हे सब के मन म करिया मन उज्जर बिषदंत…! ईंखर…
छँटेलहा चारा…!! छाँटे चारा के धुन म छँटेलहा चारा पा गएवँ ! उज्जर उल्हवा भाजी के संग गोंटकर्रा चबा गएवँ !! सुग्घर चेहरा सुग्घर ओनहा कीरा परय गुन दागी म जेला सिधवा कहिथवँ ओही मनखे मुतथे आगी म हीत-मीत के भेस म निरदई हत्यारा ल पा गएवँ ! उज्जर उल्हवा भाजी के संग गोंटकर्रा चबा गएवँ !! सनन-सनन पथरा मारे कस बोली पीरा उभारत हें मनखे ल मनखे नईं समझयँ जम्मे झन हुरियावत हें करके भरोसा अइसन हपटेवँ भर्रस ले मैं गिर परेवँ ! उज्जर उल्हवा भाजी के संग गोंटकर्रा चबा गएवँ !! प्रान जाए पर वचन न जाए तइहा ल बइहा ले गे मन ल जीत के छोटे भाई के हक ल बडे़ भइया ले…
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